आपको भी मिलेगा देशभक्त होने का प्रमाणपत्र

कितने ही साल लग गए हमारे देश के पूर्व नेताओं को देशभक्त होने का तरीका खोजने में। कुछ ने तो आजाद रहने के लिये ख़ुद को गोली तक मार ली। पर अब आपको जान देने की ज़रूरत नहीं अंततः अब खोज पूरी हो चुकी है। वो तरीका खोज लिया गया है जिससे आप देशभक्त बन सकते हैं। आपको देशभक्ति का प्रमाणपत्र पाने के लिये चाहियेः-

  1. आप सरकार के हाँ में हाँ मिलाईये। हाँ, माना कि ये नीति अँग्रेज़ों की शुरू की गई थी ताकि भारत के लोग महारानी की हुकूमत के खिलाफ़ खड़े न हो सकें पर अब वो नीति ही आपको देशभक्त बनाएगी। तो क्या हुआ अगर अँग्रेज़ों ने वो क़ानून ख़त्म कर दिया है? हम तो अपने मन का करेंगे।
  2. किसी सवर्ण-हिंदू-जाति-संगठन के सदस्य बनिये। हाँ, ये ज़रूरी है। पता है भारत में कितने हिंदू हैं? 70% तो ये अगर सारे ग़रीबों को हटा दिया जाए तो भी हिन्दू ही जनसंख्या में अधिक हैं। जल में रहे मगर से बैर न कीजिये। हाँ, हाँ, हमें पता है कि मगरमच्छ के हिसाब से चलने पर भी मगरमच्छ सबको खा जाता है। चिंता मत करिये। जब तक आप हिंदूगिरी के धंधे को बढ़ाते रहेंगे, हम आपकी रक्षा करेंगे।
  3. “भारत माता की जय” कहिये। जी हाँ। क्या कहा आपने? कौन है ये भारत माता? हमें पता नहीं, हमने तो केवल अपनी माँ देखी है। भारत माता भी ऐसी ही एक माता है। अगर भारत माता की जय नहीं बोली तो हम क्या करेंगे? अरे, हम आपको देशदोही घोषित कर देंगे। क्या कहा आपने? आतंकवादी भी अपनी बात कहलवाने के लिये ऐसे ही धमकी देते हैं? अरे हम हिंदू हैं। हिंदू आतंकवाद कहाँ करते हैं? देखिये कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और बलात्कार का मुद्दा बीच में मत लाइये। देश को इस वक़्त सिर्फ़ देशभक्ति की ज़रूरत है। और फिर किसी औरत के जीने-मरने से देशभक्ति का क्या लेना देना?
  4. “राम मंदिर” बनाने में मदद कीजिये। साथ में भगवा वस्त्र पहिनये। और भी कई काम हैं। क्या कहा आपने? अच्छा, देश में बच्चे भीख मांगने को मज्बूर किये जाते हैं? तो हम क्या करें? उन बच्चों की जिम्मेदारी उनके माँ-बाप की है। आप बार-बार ऐसे मामूली मुद्दे देशभक्ति के बीच में क्यों ला रहे हैं? क्या मतलब कि देश में अच्छे अनाथालयों की भी कमी है?

लीजिये, देशभक्ति का प्रमाणपत्र आपका हुआ। देश में कई सारी समस्याएँ हैं, लोगों को वक़्त पर न्याय नहीं मिल रहा, लोगों को जीवनसाथी चुनने का भी अधिकार नहीं, औरतों को आऐं दिन डर-डर के जीना पड़ता है, दहेज के लिये आए दिन एक बीसों औरतें जला दी जाती हैं, पानी के लिये लोग एक दूसरे का क़त्ल करते हैं, बेरोजगारी हर जगह व्याप्त है, असली किसान आत्महत्या करने पर मज्बूर है और नेता-अभिनेता और कारोबारी किसान बन कर चाँदी काट रहे हैं, जनता टैक्स के बोझ तले दबी है, जाने देश का सारा सोना कहाँ जा रहा जिसके चलते रुपये का दाम घट रहा है, इत्यादि-इत्यादि। पर हमें देश की समस्याओं से क्या लेना देना? हमें तो देशभक्ति से मतलब है। मार्केट में अभी देशभक्ति का बोल-बाला है। देशभक्ति बिकेगी तभी तो वोट मिलेंगे।

अरें आप कहाँ चल दिये? आप भी तो देशभक्ति का प्रमाणपत्र ले लीजिये।

क्या कहा? देशभक्ति का प्रमाण पत्र आपको नहीं चाहिये?

आप ग़लती कर रहे हैं, आईये देशभक्ति के प्रमाण पत्र के फ़ायदे बताऐं आपको। देशभक्ति के प्रमाणपत्र के फ़ायदे

Note:- ये लेख तत्काल में चल रही गतिविधियों पर एक व्यंग्य है। कृपया इसे गंभीरता से लें और सोचें कि कौन वो लोग हैं जो देश की समस्याओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

अपने परिजनों को कज़िन प्रेम विवाह के लिये कैसे मनाऐ?

हो सकता है कि ये एक कड़वा सत्य हो, पर हाँ, एक सुखी कज़िन प्रेम विवाह के लिये आपको अपने माता-पिता को मनाना होगा। अगर ये आपके लिये संभव न हो तो भी आपके पास कई रास्ते हैं।

एक पुरानी कहावत है:-

जो आपको मार नहीं पाता, वो आपको ताकतवर बना देता है।

लोग शादी करने के लिये मरे जा रहे हैं। अफ़्सोस, प्रेमियों के साथ भी ऐसा ही है। लेकिन जो आम मानसिकता से परे जा चुके हैं उन्हें शादी के होने-न-होने की कोई परवाह नहीं। अगर आप अपने कज़िन से शादी करने के लिये मरे जा रहे हैं तो हो सकता है कि एक दिन आपकी जान चली भी जाये। आपको कभी भी शादी जैसी तुच्छ चीज के लिये नहीं मरना चाहिये।

सबसे पहले, इससे पहले कि आप अपने माता-पिता को कज़िन प्रेम विवाह के लिये मनाने जाएं, आपको ख़ुद इस बात को समझना होगा कि कज़िन आपका भाई/बहिन नहीं है। साथ ही आपको ये बात अपने माता-पिता को समझाने की हिम्मत भी दिखानी होगी। इस पर अगर वो आपका हुक्का-पानी बंद करने की धमकी दें तो कह देना कि तुम्हें फिक्र नहीं। लेकिन ऐसा करने के लिये आपको आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करनी होगी। साथ ही ये तभी होगा जब आप शादी जैसे कर्म-कांड से ऊपर उठ चुके हो, यक़ीन मानो इससे आप ख़ुद को मजबूत महसूस करोगे।

कज़िन विवाह की वैधानिकता का मुद्दा सिर्फ़ हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख समुदाय के लोगों के साथ है (शादी-विवाह के मद्दे क़ानूनन जैन, बौद्ध और सिख भी हिंदू है)। दुनिया के प्रमुख चार समुदाय में से सिर्फ़ हिंदुओं में ही ये समस्या है और इस पर भी ये समस्या ज्यादातर सिर्फ़ उत्तरी भारतीयों के साथ है। हालाँकि, जहाँ समस्या है वहाँ निदान है।

सत्य ही निदान है

जी, हाँ। हालाँकि कज़िन शादियां प्रतिबंधित हैं पर इसका सीधा-साधा मतलब है कि आप मैरिज़ रजिस्ट्रार के पास से शादी का प्रमाणपत्र नहीं ले सकते (ऐसा विदेशी मैरिज़ रजिस्ट्रार के साथ नहीं है)। आप जब तक चाहें तब तक अपने कज़िन के साथ उसकी मर्जी पर रह सकते हैं। आप बच्चे पैदा करिये, अपना परिवार बनाइये, घर बनाइये। छोटे शब्दों में, शादी की कोई ज़रूरत नहीं अगर आपके पास पर्याप्त पैसा, प्यार और खुला दिमाग है। लेकिन अगर आप बिना ब्याह गुज़ारे में विश्वास नहीं रखते तो हमारे पास एक और अचूक समाधान है।

कज़िन प्रेम विवाह पर अपने परिजनों को भी बुलाइये

लीजिये, अब आप जान गए कि आपको क्या करना है। पर ये हिम्मती लोगों के लिये है। भींगी बिल्लियाँ वापस जाएं, प्यार-मुहब्बत को चार गालियां दें और एक कोने में बैठ कर दुनिया के अंत का इंतिज़ार करें।

अपने परिजनों को शादी में बुलाने का मतलब है कि आप उन्हें रजिस्ट्री पोस्ट के ज़रिये शादी का निमंत्रण पत्र भेजे। रजिस्ट्री पोस्ट की रसीद इस बात का प्रमाण होगी कि आपके माता-पिता ने आपकी शादी को मूक सहमति दे दी है।

प्यार की राह पर आगे बढ़ने से पहले आपके पास अच्छा पेशा, जेब में रुपये, बैंक में मुद्रा (नई शुरुवात के लिये), हिम्मत जो अंत तक ख़त्म न हो और ऐसा प्यार चाहिये जो प्यार की हर कसौटी पर खरा उतरा हो। अगर आपकी/आपका प्रेमी अपने पैरों पर न खड़ी/खड़ा हो तो उसकी मदद कीजिये। प्यार की राह में कई इम्तिहान होते हैं और इन्हीं इम्तिहानों से आपको प्यार की सच्चाई का पता लगा सकते हैं।

Know How to test if your lover loves you most!!!

सत्यता में प्रेम में आपके साथी से ज्यादा आपका समर्पण मायने रखता है। साथी कुछ भी हो पर उसे फ़िर भी प्रेम करते रहेंगे। मेरी सलाह, अगर आपके साथी ने आपसे वाकई में प्रेम किया हो तब आप उसका साथ अपने जीवन के अंत तक न छोड़ियेगा। पर अगर आप नहीं जान पाये कि अगर आपकी पसंद ने आपको पसंद किया है तो उससे एक बार ज़रूर पूछ लीजिये।

इस जहान का सबसे कठिन कार्य है अच्छे रुपये कमाना। आज के दौर में तो ये और भी कठिन हो गया है। जब आपकी/आपका साथी ख़ुद को पैरों पर खड़ी/खड़ा करे तब तक आपका भी ऐसा ही करने का फर्ज़ बनता है। अगर आप पहले से रुपये कमा रहे हो तो अपने प्रेम को भी रुपये कमाने में मदद कीजिये, उसे आर्थिक स्वतंत्रता दीजिये, यही तो प्रेमी करते हैं। याद रखिये, अगर आपके परिजन आप पर किसी भी प्रकार का शारीरिक क्षति पहुंचाने के मद्दे से आक्रमण करते हैं तो आप तुरंत अपने प्रेमी/प्रेमिका के साथ जा सकते हैं।

P.S. Anyone reading this post must read LAWFUL SAFETY GUIDE FOR ELOPING LOVERS

याद रखें, सुरक्षा ही रक्षा है।

जब भी हमने प्रेम को परखा एक ही बात को जाना:-

“प्यार कोई कर्म या ओहदा नहीं, प्यार ही ज़िंदगी है और ज़िंदगी बहुत कठिन है।”

आप यक़ीनन अपने कज़िन के साथ रह सकते हैं पर इसके साथ ही आपको क़ानूनी मुक़दमे के लिये तैयार रहना होगा। आज के समय में परिजनों के सींग उग आए हैं। अगर आप ने किसी की बेटी से प्यार करने की हिम्मत की है तो उसके परिजन आपको झूठे बलात्कार के मुक़दमे में फँसाने से भी नहीं चूकेंगे। पर जहाँ समस्या है, वहाँ निदान है।

हालाँकि हमारा संविधान हमें हमारा जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं देता पर वो हमें किसी के साथ, उसके मर्जी पर, रहने से भी नहीं रोकता। अगर कोई आपको किसी के साथ रहने से रोकता हो तो आप उस पर संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत मुकदमा कर दें और कोर्ट को यह सूचित करें कि आप अपने माता-पिता के साथ और नहीं रहना चाहते/चाहतीं।

लेखक की सभी कज़िन प्रेमियों के लिये सलाह

अगर आप महिला हैं और अपने कज़िन से प्रेम करती हैं तो आपको इस बात के लिये संतुष्ट हो जाना चाहिये कि –

  • आप आर्थिक रुप से स्वतंत्र हैं। किसी भी और चीज से पहले इसे करें।
  • आप किसी भी परिस्थिति का सामना की हिम्मत रखती हैं।
  • आपने अपने प्रेमी के प्रेम को अच्छे से  परखा है। याद रहे, लोग उन्हीं को धोखा देते हैं जो उन पर यक़ीन करें। कभी भी असावधान न रहें।
  • आप किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिये शारीरिक और मानसिक रुप से सक्षम हैं। दुनिया में लोग कमजोर लोगों को ढूँढ़ रहे हैं जिन्हें वो वेश्यावृत्ति के दलदल से ढकेल सके या आतंकवाद फैलाने के लिये आत्मघाती हमलावर बना सकें। जिसे आप अच्छे से न जानते हो उस पर विश्वास न करें। अपने साथ हमेशा एक चाकू या पेपरवेट-दुपट्टा रखे। आप कहीं से भी पत्थर भी पा सकती हैं। याद रखिये हमलावर भी इनसान है और चोट उसे भी लगती है। साथ ही आप अपनी आत्मरक्षा में किसी की हत्या भी कर सकती हैं।

Read: – You have right to protect yourself

  • हमेशा एक अच्छे वकील को संपर्क में रखें। अगर आप अपने प्रेमी के साथ जाने का सोच रहीं है तो आपको भविष्य में याचिका दायर करनी पड़ सकती है।
  • दुनिया में अपने जैसे प्रेमियों के संपर्क में रहें। हो सके तो अपने आस-पास में मौजूद प्रेमियों के संपर्क में रहें। तकनीक के दौर में ये करना ज्यादा मुश्किल नहीं है, है क्या?
  • आपको आपकी सुरक्षा के लिये जो भी उपाय दिमाग़ में आए उसे तुरंत अपनाएं। याद रखें, आपके शत्रु आपकी लापरवाही की ही ताक में हैं। जहाँ आपके ख़ुद के परिजन आपके शत्रु बन बैठे हों वहाँ वो आपको ज्यादा हानि पहुँचा सकते हैं।

सुरक्षित रहें, क़ानून को माने और प्रेम करते रहें!!!

Lawful Safety Guide for Eloping Lovers

In India, the next level of love is eloping. Many of us believe in convincing our parents for love marriage but parents never live up with our dream. Mindless and bogus issues like religion, country, language, race, color, caste, creed, locality, punctuality, hair color, cloth color, teeth color, eye color and 1 million other issues are always made up by your parents and their shameless relatives (like brother of your uncle’s brother-in-law) to stop you love marrying. The thing is when you just want cheap sex in the name of marriage, nobody goes against you, but whenever you want to marry because you love somebody the whole world goes against you.

In such situation, people resigned to eloping. Eloping is good. It’s good to live your dream with your soulmate rather than with a horde of savage social animals we call well-wishers and relatives (What word do you use for a person who married for the free maid and cheap SEX?). But there is always a risk in eloping. People get killed or get arrested for rape (mostly male lovers).

To sort out this problem, we have prepared a walkthrough guide for your lawful eloping. Remember people, this guide was prepared while keeping Parallel Cousin Marriages in Mind. If this guide can work with them, it will definitely work with you.

How to safely Elope?

Eloping may mean “marrying secretly” but for this guide “ELOPING MEANS MARRYING WITHOUT FEARING PARENTS”. Follow these simple milestones for safe eloping:-

First Milestone

Given below are five simple elements of safe love marriage:-

  • Adulthood Evidence: – Aadhar Card, Ration Card, 10th Marksheet, PAN Card which can show your age. 18 for Girls, 21 for Boys.
  • Your Money in the Bank: – As much as you can hold. The Bigger amount, the better.
  • A Job: – Bigger pay, the better.
  • Modest and broadminded thinking: – The essence of loving.
  • Connection with other lovers around the country: – Lovers in the locality are better.

If any one of the above-noted element is missing then bag that as soon as you can. Remember, a big amount at the bank is not necessary but money is the oil of love machine, keep enough of this oil in reserve for a successful love life.

Second Milestone

If you are a woman, you should have guts to tell parents what you wants. This will be simple if you have financial independence and enough brain to filter craps like culture and Sanskaari s**t. The process of convincing your parents may get really ugly, and parents reaction can go even uglier than you might even imagine. You should keep a backup plan. If they lock you in a room, just break through the window, burn down the goddamn house and reach the mass media. Then file a Habeas Corpus writ under Article 226 of Constitution of India. According to law, a person (even your parents) cannot restrain you in any house. In a Supreme Court case an underage girl, who was subject to abuse of her parents, was allowed to live with her Grandmother. If an underage girl can claim her freedom from abuse, so can you.

Third Milestone

If a woman is leaving her house to live with her cousin, please secure your birth evidence and your educational certificates and file an application before a Judicial Magistrate, affixing a photocopy of your birth evidence (like PAN Card, 10th Marksheet, Driving License, Aadhar Card). The application can have title stating “For Permission to Live-in-Relationship”. According to law, even the Judge cannot allow you to marry your cousin lawfully (unless your customs say so), but this application will keep your lover off the trouble. Parents are shamelessly filing rape cases against the male lovers.

Fourth Milestone

If the parents or any dumb relative (like your distant or real uncle) are harassing you, file a writ under Article 226 of Consitution of India. If they can act badly against you, do the same to them, give them the taste of their own s**t. I know you’ll be called bad kids, but you are not a kid anymore. You are an adult person who is being harassed for loving, meanwhile, the whole goddamn world is taking the side of the offender (not a big surprise, though, they are all dumbhead f**kers). Take some action or play dead.

Fifth Milestone

If your parents do not do anything nasty after you leaving their house, write an emotional letter, say few words of truth and formally and officially invite your parents to your marriage. This means you have to send them the marriage card, via registered post. Keep the receipt of registered postal order, it will be the proof of your lawful cousin marriage. If your parents don’t turn up on your marriage day, you’ll claim your legal marriage certificate as they gave their silent approval to your relationship.

That’s it. Happy Married Life. Send us your story, we’ll send you a greeting every anniversary of your love marriage.

Send us your story, we’ll happily send you a greeting on every anniversary of your love marriage.

कैसे कज़िन लव और शादी वर्जित बन गई?

क्यों कज़िन मैरिज विवादित है?

कज़िन मैरिज न तो अप्राकृतिक हैं न ही असामाजिक। अगर कज़िन मैरिज के विवादित होने का कुछ कारण है तो वो है माता-पिता की युवा पर अंकुश लगाने की ज़िद। दुनिया के चार प्रमुख धर्मों: ईसाई, इस्लाम, हिंदू और बौद्ध में केवल भारतीय हिंदुओं को ही कज़िन मैरिज के समस्या है। इस पर भी केवल उत्तर भारतीय हिंदुओं की ही ये अवधारण है कि कज़िन भाई-बहिन होते हैं। इन में से ज्यादातर इस मामले में बात नहीं करना चाहते, पर सिर्फ़ आपके बात न करने से किसी समस्या का निवारण संभव नहीं। स्वैच्छिक कज़िन मैरिज पर उत्तर भारतीयों का विरोध और विरोध के लिये ऊलजलूल तर्क हास्यप्रद हैं। इस पर युवा भी अब कज़िन मैरिज पर होने वाले विरोध पर सवाल करने लगा है। कज़िन मैरिज पर होते विरोध के समर्थन में भारतीय हिंदुओं के पास केवल एक ही तर्क है – “Prohibited Degree of Relationship”।

क्या है “Prohibited Degree of Relation”?

भारत देश की विधानसभा का एक बहुत घृणित सत्य है, वो युवा को लेकर उदासीन है और दक़ियानूसी भी। बात 1955 में भी देश की विधान रचनाकार दक़ियानूसी थे। भले ही उन में से कुछ ने देश के लिये जान दी हो, पर वो लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन और पहचान की थी। कहना ग़लत न होगा कि उन्होंने हमें एक गड्ढे से निकाला और गड्ढे पर लगी पट्टी बदल कर वापस उसी गड्ढे में डाल दिया। हमें ग़लत न समझे, हम उन तमाम शहीदों को भी नमन करते हैं जिन्होंने हमें अशिक्षा के अंधकार से निकालने की कोशिश तक नहीं की, पर फ़िर भी हमें उन लोगों से रोष है जिन्होंने उन चीज़ों की सही करने की कभी कोशिश नहीं की जिसे सही करने की सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।

कुछ भी हो, जब हिन्दू विवाह अधिनियम बन रहा था तब हमारे देश के कर्णधार विवाह की परिभाषा तय कर देना चाहते थे। ताकि हिन्दू विवाह, मुस्लिम विवाह से, बिल्कुल अलग रहे इसलिये उन्होंने “prohibited degree of relationship” बनाया। इस तरह हमारे आज़ाद देश के कर्ता-धर्ताओं ने देश के सबसे बड़े तबक़े को शादी जैसे संवेदनशील मुद्दे के लिये युवा को समाज और परिजनों का ग़ुलाम बना दिया। उन्होंने हमें तैंतीस प्रकार के रिश्तों में बाँध दिया। बाप बेटी और माँ बेटे से लेकर दूर-दराज़ के संबंधी तक को विवाह करने से मनाही कर दी गई।

Full list of Degrees of Prohibited Degree of Relationship

पर उन्होंने ऐसा क्यों किया?

उन्होंने ऐसा क्यों किया इसका जवाब उन लोगों के साथ उनकी कब्र में जा चुका है। फ़िर भी हम इतिहास से सत्य की खोज कर सकते हैं।

चलिये, कुछ साल पीछे जाइये और भारतीय परिवारों की संरचना देखिये। आपका क्या दिखता है? सिर्फ़ संयुक्त परिवार। जिन्हें संयुक्त परिवार के बारें में नहीं पता वो जान लें कि संयुक्त परिवार में एक ही व्यक्ति की कई पीढ़ियाँ एक-साथ निवास करती हैं। ऐसे परिवार में सबसे अमीर सबसे ताकतवर होता है और सबसे बूढ़ा सबसे सम्मानित। जब संयुक्त परिवार होते थे तो एक व्यक्ति के सारें बेटे एक ही घर में रहते थे, साथ में रहते थे उनके बच्चे।

भारतीय संस्कृति में हम नियोजित प्रजनन में विश्वास रखते हैं… जरा एक मिनट रुकिये, नहीं ऐसा नहीं है, हम नियंत्रित प्रजनन में विश्वास रखते हैं। नियंत्रित प्रजनन उसी तरह है जैसे बेचने के लिये घोड़ों की होती है। अगर विश्वास न हो तो अखबार का ‘परिणय’ पृष्ठ (Matrimonial Page) निकालिये। जी हाँ, इसी को कहते हैं नियंत्रित प्रजनन। यही वो तरीक़ा जिससे लोग अपने घोड़ों… मेरा मतलब है अपने बच्चों के लिये रात-का-साथी ढूँढ़ते हैं। अगर ये नियोजित प्रजनन होता तो हम 120 करोड़ न हुए होते। हालाँकि, हम 120 करोड़ हैं पर हमारी दशा क्या है? शायद ये सोचने की ज़रूरत है कि आपके पूर्वज अगर मध्यमवर्गी थे तो आप भी मध्यमवर्गी क्यों रह गए?

आज ही की तरह, संयुक्त परिवार में भी बच्चे संख्या में अपने माता-पिता को पछाड़ देते थे। एक जोड़ा रातों-रात सात-सात बच्चों की पूरी टोली बना लेता था।

किसी तरह, ज्यादातर परिजन एक अवधारणा को हर बच्चे के हलक के नीचे उतार देते थे कि जिससे भी वो मिलते हैं वो उनके भाई-बहिन हैं। उन्होंने एक दूसरे को भाई-बहिन कहा, इसमें कोई बुराई नहीं। अच्छा होता अगर बच्चे उसे दिल से मानते (इस तरह देश की जनसंख्या इतनी भयानक न हुई होती, सब भाई-बहिन हुए तो कोई प्रजनन नहीं)। हक़ीक़त में ये बच्चों के माता-पिता के साथ भी हुआ था और दादा-दादी के साथ भी। सबको एक दूसरे का भाई-बहिन बताने की काम किया जाता था। वो एक दूसरे को भाई-बहिन मानते थे भले उनके बीच रक्त संबंध रहा हो या नहीं। यहाँ तक कोई समस्या नहीं थी। समस्या तब शुरु हुई जब माता-पिता ने ये सोचना शुरु कर दिया कि अगर हम किसी रिश्तेदार को भाई-बहिन बोलते हैं तो उसके और हमारे बच्चे भी आपस में भाई-बहिन होंगे।

कालांतर में, जब कज़िन्स (रिश्तेदार) साथ रहते थे तो वो भी यही समझते थे कि वो भाई-बहिन हैं। आज, जब परिवार बिखर चुके हैं और सब दूर-दूर रहने लगे है तो एक सत्य उस अवधारणा पर भारी पड़ गया हैः – “रिश्तेदार भाई बहिन नहीं होते।”

पर यहाँ कहानी ख़त्म नहीं होती। अब सत्य और अवधारणा के बीच में घर्षण होने लगा है। इसी लिये प्रेमी हत्या (जिसे लोग कुटिलतापूर्वक Honor Killing का नाम देते हैं) अस्तित्व में है। लेकिन सिर्फ़ कुछ बताने से समस्या का निवारण नहीं होता। हमें ये सत्य समझना होगा कि चाचा के बच्चे, मामा के बच्चे, फूफा के बच्चे आपस में भाई-बहिन नहीं, वो सिर्फ़ रिश्तेदार हैं।

इसी श्रृंखला का हमारा अगला लेख पढ़ियेः-

Legality of Cousin Marriages and the big friction-Part-3

कज़िन लव और कज़िन मैरिज का वैधानिक पहलू…

कज़िन लव और कज़िन मैरिज पर उठते सवालों का जवाब

कज़िन मैरिज, भले ये अंग्रेजी का शब्द हो पर इसके बारे में हमारे देश का हर व्यक्ति जानता है। हमारे देश में कज़िन को चचेरे, ममेरे, फुफेरे भाई बहिन के नाम से बुलाया जाता है। इस पर भी कुछ वक़्त से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ कज़िन ने आपस में शादी की है या वो शादी करना चाहते हैं। यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या जिन्हें सभी भाई-बहिन बताते हैं क्या उन के बीच में शादी होना ठीक हैं?

हमारे देश में शादी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। चाहे हिंदू हो या मुस्लमान, हर किसी को शादी के आगे कुछ दिखाई नहीं देता है। ऐसे में शादी से संबंधित सारे फ़ैसले लेने का जिम्मा सिर्फ़ पिता उठाना चाहता है। भले बाल विवाह की प्रथा को समाप्त मान लिया गया हो पर पिता की मर्जीं पर ही शादी होना बाल विवाह का ही रूप है। ऐसे में कज़िन मैरिज पर बहस ही नहीं होनी चाहिए। परंतु क्योंकि प्रत्येक चीज परिवर्तनशील है इस कारण इसके बारे में जानना अति-आवश्यक है।

देश में कज़िन को भाई-बहिन मानने वालों का यह भी मानना है कि कज़िन मैरिज प्रकृति के विरुद्ध है (हमेशा की तरह आदमी ही तय करने लगा है कि प्रकृति के विरुद्ध क्या है और क्या नहीं)। मनुवादी सभ्यता में जहाँ औरत को घर में कैद करके रखने का अथक प्रयास होता है वहाँ कज़िन मैरिज पर कई तरह के प्रतिबंध लगना सामान्य है। पर हमारे देश में सब कुछ विधि के द्वारा चलता है तो हमें विधि के बारे में भी जान लेना चाहिये। भले समाज की इस विषय में जो भी अवधारण हो पर समाज के पास उसका ख़ुद का कोई दिमाग़ नहीं (तभी तो समाज में तर्कों का कोई स्थान नहीं)।

विधि में शक्ति होती है और विधि में लिखी कोई भी बात किसी सही बात को ग़लत बना सकती है और ग़लत बात को सही भी। आईये जानते हैं कि विधि कज़िन मैरिज के बारे में क्या कहती है।

कज़िन मैरिज पर विधि

अफ़्सोस, विधि कज़िन मैरिज के बारे में कुछ नहीं कहती। यहाँ तक की विधि में कज़िन शब्द का प्रयोग भी नहीं किया गया है। भारतवर्ष में दो वैवाहिक विधियाँ हैं, हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 और विशिष्ट विवाह अधिनियम, 1954। दोनों ही अधिनियम में ऐसे प्रावधान है जिससे कज़िन विवाह पर प्रतिबंध सा लग गया है।

आप में से कुछ बंधु प्रतिबंध का वैधानिक अर्थ शायद न जानते हों। क़ानूनन प्रतिबंध का मतलब है कि आपको कुछ नहीं करना चाहिये। परंतु प्रतिबंध में हमेशा कुछ अपवाद होते हैं। भारत में दहेज प्रथा पर प्रतिबंध है पर 99.9% शादियां दहेज के साथ होती हैं। इसी तरह भारत के विवाह अधिनियमों में  “Prohibited Degree of Relationship” का उपयोग किया गया है।

“Prohibited Degree of Relationship” केवल हिन्दू, सिक्ख, जैन और बुद्ध समुदाय पर ही लागू है। इस “Prohibited Degree of Relationship” के हिसाब से पिता की पाँच पीढ़ियों और माता की तीन पीढ़ियों के बीच में विवाह नहीं होना चाहिये। परंतु अगर सामाजिक रीति और रिवाज़ या पारिवारिक रीति-रिवाज़ कज़िन मैरिज को लेकर सहमत हैं तो कज़िन आपस में शादी कर सकते हैं। इस पर युवा का एक बहुत जायज सवाल है – “समाज या परिवार कौन होते हैं ये तय करने वाले कि हम किस से शादी करें?”

युवा पीढ़ी एक ही वक़्त पर संवेदनशील, ग़ुस्सैल, मूर्ख, समझदार सब होती है। तिस पर भी युवा की एक बात बहुत अच्छी है, वो अपने पूर्वजों की ग़लतियों को दोहराने में विश्वास नहीं रखते न ही उनकी तरह किसी रीति-रिवाज़ को बिना सोच विचार के अपनाते हैं। यहाँ एक ओर युवा को ये पूरा हक है कि वो अपने पसंद के जीवनसाथी के साथ रहें पर वो भी विधि को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते। कम से कम युवा को तो किसी भी तरह के साहसिक कदम को उठाने से पहले विधि को ज़रूर जान लेना चाहिये। जब सारे दरवाज़े बंद हो जाते हैं तब विधि और न्याय ही आख़िरी रास्ता बचता है। विधि के विषय में जागरूकता बहुत ज़रूरी है।

कृपया इस श्रृंखला का हमारा अगला लेख पढ़े:-

कज़िन लव मैरिज पर इतनी आपत्ति क्यों?

Why section 377 should be repealed?

Section 377 is the most controversial section of our penal code. A section that has our attraction because the people fought against this Controversial section. But the question is why this section even exists. So let’s take a little history lesson.

How the Section 377 came into existence?

Back in time, when the India was taken by Queen Victoria from the hand of East India Company, there were the troubles faced beforehand. There was no unified law in the Indian sub-continent. To solve this problem, they sent Sir Thomas Babington Macaulay. Sir Macaulay drafted a lengthy draft, containing 511 Sections.

Now, the draft was called Indian Penal Code back in 1860, but it wasn’t Indian in its soul. The sections of Indian Penal Code were based on the law settled in England. Fair enough, they were also effective in India.

Back in then, the church was the prominent preacher of England and its speak was also supported by Crown. The church back then was too much interfering. In the eye of the church, the sex was an activity must be done for procreation. Because of this teaching all carnal intercourse other than the vaginal were hailed as unnatural. You can still see the effect of Churches teaching when you hear an Indian woman died because church refused to allow abortion.

Current status of Section 377 and what’s now in England?

Well, the main source of English Law is the court judgments. There is written law in England but they are not so extensive like Indian. There was no Section 377 in England. However, they signed a UN Declaration that ensure rights or LGBT and now same-sex marriage is legal in there. Even they passed Gender Recognition Act, 2004, which prohibits any hateful act against LGBT. In India, however, the situation has worsened.

Now, Indian people have recognized their right to equality and right to liberty. They accept the things they like and reject what they don’t. The fundamentalist and so-called good people have raped and killed LGBT. While they should be hanged by the neck for such act, they take the support of Section 377.

Sign Mr. Shashi Tharoor’s Petition to remove Section 377 from Indian Penal Code

संवैधानिकता क्या होती है?

आपने सुना तो होगा ही कि सर्वोच्च न्यायालय धारा 377 की संवैधानिकता जाँच रही है। सवाल ये उठता है कि क्या होती है संवैधानिकता और इससे क्या होगा? आईये, जानते हैं।

संवैधानिकता का अर्थ

संवैधानिकता देश में लागू हर एक विधि और नियम का अंतिम परीक्षण है। किसी विधि या नियम के देश में लागू होने के लिये उसका संवैधानिक होना अतिआवश्यक है। इसी कारण जब भी विधानसभा कोई नई विधि बनाती है तो न्यायालय इस बात का ध्यान रखती है कि विधि संविधान के मुताबिक लागू हो। संविधान के कारण ही पुलिस और सरकार तक विधि को मानने के लिये बंधे होते हैं।

संवैधानिकता से ही किसी विधि के ठीक होने का पता चलता है। परंतु फ़िर भी विधि कई तरीक़ों से ग़लत हो सकती है। जब भी हम समलैंगिक जनों पर धारा 377 के चलते होते अत्याचार की ख़बरें पढ़ते हैं तो ये समझ आता है कि संवैधानिक घोषित विधि में भी खामियाँ हो सकती हैं।
संवैधानिकता के मापदंड क्या हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 में लिखा है –

Article 13

ऊपर दिये अनुच्छेद से ही किसी विधि की संवैधानिकता का पता लगाया जा सकता है।

कुछ शब्दों में, जो भी विधि मूल अधिकारों के अनुकूल नहीं है उसे अस्तित्व में नहीं रहना चाहिये।

धारा 377 की प्रकृति विरुद्ध प्रकृति

हम में से कई लोगों ने धारा 377 के विवाद के बारे में तो ज़रूर सुना होगा। देश की सर्वोच्च न्यायालय इसकी संवैधानिकता को जाँचने वाली है। पर आख़िर ये धारा 377 है क्या?

जानें संवैधानिकता क्या होती है?

धारा 377, एक प्रकृति विरुद्ध धारा

धारा 377 या सही शब्दों में भारतीय दण्ड संहिता (ताज़ीरात-ऐ-हिंद) की दफ़ा 377 “प्रकृति विरुद्ध अपराध” के बारें में बात करता है। आप “प्रकृति विरुद्ध” शब्द के कारण भ्रमित हो सकते हैं क्योंकि प्रकृति के विरुद्ध क्या है ये तय करना किसी मनुष्य के बस में नहीं। परंतु भारतीय दण्ड संहिता में इसके बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है। आईये जाने कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा क्या कहती हैः-

धारा 377. प्रकृति विरुद्ध अपराध – जो कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्दियभोग करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

स्पष्टीकरण – इस धारा में वर्णित अपराध के लिए आवश्यक इन्द्रियभोग गठित करने के लिए प्रवेशन पर्याप्त है।”

भारतीय दण्ड संहिता को पढ़े!!!

धारा 377 का सीधा अर्थ है कि पुरुष द्वारा योनि-मैथुन के अलावा किसी भी अन्य प्रकार का मैथुन प्रकृति विरुद्ध है। इस हास्यपद धारा के मुताबिक देश के लगभग 98% पुरुष/लड़के धारा 377 के अपराधी घोषित हो जाने चाहिये (जिस-जिस का इसमें कभी हाथ रहा हो)।

धारा 377 का विवाद क्या है?

भारत में जो भी आपसी सहमति से हुआ है वह तब तक अपराध है जब तक उस पे समाज की सहमति न हो। समाज सब कुछ नियंत्रण में करना चाहता है और इसी कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है। अपराध होने की स्थिति में सरकार का यह दायित्व है कि वह अपराधी को सज़ा दिलाए। अगर अपराध किसी व्यक्ति द्वारा पंजीकृत किया गया है तो अपराध पीड़ित को न्याय दिलाने के लिये होता है। सामान्य परिस्थितियों में सरकार तभी आपराधिक मुकदमा चलाती है जब किसी व्यक्ति को पीड़ा हुई हो। दुर्भाग्य से धारा 377 समलैंगिक संबंधों की स्थिति में स्वतः ये मान लेती है कि उन्होंने ने प्रकृति विरुद्ध अपराध किया है, अर्थात योनि संभोग के अलावा किसी अन्य तरह का संभोग किया है।

सामान्यतः अगर पीड़ित स्वयं मुकदमा दर्ज कराए तो ही उपचार देना सरकार की जिम्मेदारी है, परंतु धारा 377 में “स्वेच्छया” शब्द के कारण अगर किसी तीसरे व्यक्ति को दो लोगों के समलैंगिक संबंधों से आपत्ति है तो वो भी मुकदमा दर्ज करा सकता है। ऐसी स्थिति में अगर संबंध आपसी सहमति से भी बनाए गए हों तो भारतीय दण्ड संहिता ये सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ती कि समलैंगिक जन को दण्ड मिले।

ऐसे अमानवीय और पूर्वनिर्णय से भरी धारा के कारण समलैंगिक जन को समाज के दुष्ट लोगों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है जिस कारण धारा 377 को ख़त्म करना या उस में फेर बदल करना अति आवश्यक है। धारा 377 की आड़ में लोग अपना हित साधने की कोशिश करते हैं और अपनी दुष्टता पूर्ण योजनाओं के ज़रिये एक समुदाय विशेष को नुकसान पहुँचाते हैं। दो समलैंगिक जनों पर धारा 377 का उपयोग उतना ही घृणित है जितना किसी पुरुष या स्त्री पर झूठा बलात्कार का मुकदमा लगाना। धारा 377 पर सर्वोच्च न्यायालय के संवैधानिकता की जाँच एक स्वागत योग्य पहल है। हो सकता है कि आपको किसी के समलैंगिक संबंधों से कोई परेशानी न हो, पर आपकी इस विषय में निष्क्रियता ऐसे लोगों के षड्यंत्रकारी कुकर्मों को बढ़ावा है जो धर्म और संस्कारों के नाम पर लोगों की ज़िंदगी तबाह करते हैं।

कृपया हमारे अगले लेख को पढ़े।

जानिये क्यों धारा 377 ख़त्म होने लायक है!!!!

श्री शशि थरूर जी की धारा 377 को ख़त्म करने वाली याचिका पर हस्ताक्षर करें

What is controversial Section 377?

Many of you may have heard that the Supreme Court of India is trying to test the Constitutionality of the controversial Section 377.

What is Constitutionality?

What is Section 377?

The Section 377 or Section 377 of the Indian Penal Code is the law that particularly speaks about the “Unnatural Sex”. You may find the term “Unnatural Sex” confusing because there is no such this in reality. But since the law talks about it so we will do that as well. Let’s have a look what exactly Section 377 of Indian Penal Code says about it:-

377. Unnatural offences: – Whoever voluntarily has carnal intercourse against the order of nature with any man, woman or animal, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

Explanation- Penetration is sufficient to constitute the carnal intercourse necessary to the offence described in this section.

So you see, the Law has branded an act as “Unnatural”. It must be kept in mind that anything tagged as a punishable offence and can set you inside the jail for a long time.

Know about Indian Penal Code!!!

So what is Controversy about the Section 377?

In India, everything that is consensual and offence is an offence. Society wants to control everything and that’s what made it controversial. It is assumed that Lesbian, Gay, Transgender and Bisexual people are completely sex-oriented people. If you are an LGBT you’ll be assumed to done sex with your partner. Now, because having relationship means consummating and the law says that it must be done with so-called Natural organs, which you cannot, you have done “Unnatural Sex”.

There is a reason behind such the abusive and illogical section inside our Penal Code.

Please Read our next article:-

Why section 377 should be repealed?

जानिये क्या है धारा 377 का इतिहास!!!!

धारा 377 के बारे में तो आपने सुना ही होगा पर क्या आप जानते हैं धारा 377 का इतिहास? यही वो धारा है जिसने कुछ वक़्त पहले एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। वह विवाद आज भी अस्तित्व में है। लोग इसके बारे में जाने या नहीं पर बातें सब खूब करते हैं और 377 के सबसे बड़े पीड़ित, LGBT समुदाय के लोगों को गालियाँ भी देने लगते हैं। जानकारी के आभाव में हम अनाप-शनाप बोलते हैं जिससे किसी का भला नहीं होता। तो क्यों न आज हम जानें कि आख़िर क्या है धारा 377 का इतिहास? चलिये जानते है इसके बारें में, इसके इतिहास से।

धारा 377 का इतिहास, इस धारा का जन्म

सालों पहले, जब महारानी विक्टोरिया ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से भारत का साम्राज्य लिया तब, अंग्रेजों के सामने एक भारी समस्या थी। भारत साम्राज्य में तब कोई एक क़ानून नहीं था। इस समस्या को सुलझाने के लिये इंग्लैंड ने सर थामस बेबिंगटन मैकाले को भेजा गया। सर मैकाले ने तब 511 धारा वाली एक लम्बी संहिता बनाई। आज हम उसी 511 धारा वाली संहिता को भारतीय दंड संहिता (ताज़िरात-ए-हिंद) के नाम से जानते हैं। इस संहिता की कुछ धाराऐं जैसे धारा 302, 307, 498-A, 120-B, 420 बहुत प्रसिद्ध हैं। उस संहिता का नाम भले ही कुछ भी रखा गया हो पर ये संहिता पूरी तरह भारतीय नहीं है न ही कभी थी। भारतीय दंड संहिता की आत्मा में अंग्रेजों का क़ानून था जो इंग्लैंड में जन्मा था। तब भी ये संहिता भारत में ख़ूब काम आई।

जब संहिता लिखी जा रही थी तब इंग्लैंड की राजसत्ता पर चर्च हावी था। सन् 1800 की उस सदी में चर्च का मानना था कि संभोग सिर्फ़ बच्चे पैदा करने के लिये होना चाहिये। इस कारण योनि-मैथुन के अतिरिक्त तमाम संभोग अप्राकृतिक घोषित कर दिये गए। जिस चर्च की रूढ़िवादिता के कारण एक भारतीय महिला गर्भपात न होने देने के कारण 21 सदी में मर जाती है, उस चर्च की सन् 1800 में ताकत का अंदाजा अाप साफ़ लगा सकते हैं। जी हाँ, धारा 377 अप्राकृतिक संभोग के बारे में बताती है और उसके लिये दण्ड भी निर्धारित करती है।

धारा 377 की इंग्लैंड में स्थिति

इंग्लैंड की न्याय व्यवस्था न्यायालयों के निर्णयों पर आधारित है। इंग्लैंड के न्याय लिखित संहिताओं पर बहुत कम निर्भर है। साथ ही वहाँ का लिखित न्याय साहित्य भारतीय न्याय साहित्य की तरह विशाल नहीं है। इंग्लैंड में इसी कारण कोई धारा 377 नहीं है। इंग्लैंड के UN Declaration पर हस्ताक्षर करने के बाद वहाँ पर LGBT समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की पहल ख़ुद वहीं की सरकार ने की है। यहाँ तक की इंग्लैंड ने Gender Recognition Act,  2004 भी पारित की है जो LGBT समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ किये किसी भी कृत्य के लिये दण्ड निर्धारित करती है। अफ्सोस, भारत में LGBT समुदाय की स्थिति बहुत हद तक बिगड़ चुकी है।

जहाँ धारा 377 के जन्मदाता इंग्लैंड ने इसे कभी अपना क़ानून नहीं बनाया, वहीं भारत में इस क़ानून की आड़ में LGBT समुदाय के लोगों की बलात्कार और हत्या की जा रही है। हमारे देश में जीवन का अधिकार प्रत्येक मनुष्य को मिला है पर धारा 377 LGBT समुदाय से जीवन का अधिकार ही छीन ले रहा है। समय वाक़ई बहुत बड़ी माँग कर रहा है। परिवर्तन आज नहीं तो कल होना ही है। सारे रूढ़िवादी ख़त्म होंगे और LGBT समुदाय को जीवन का अधिकार मिलेगा। ये हमारे ऊपर है कि हम इसके लिये उनका कितना ख़ून बहने देते हैं।

श्री शशि थरूर जी की धारा 377 को ख़त्म करने वाली याचिका पर हस्ताक्षर करें

Legal side of Cousin Love and Cousin Marriage

Is cousin marriage all right? It is a big question in the Indian Society. Are they okay or not is a matter of discussion. Some people (mostly fundamentalist or Manuvadi) claims it as a sin against nature and the god. We are not god (as manager of the gods will say) but we are the god of our own life. In recent times, we have seen so many clandestine and openly discussed a way of living that our society is overwhelmed by it.  However, the society is not law, neither a lawyer, bloody hell society is not a person either. So why should blindly trust and listen to something which has no brain or heart?

kissing-cousins

But we live in a well-structured net of laws. It protects, prohibits some and punish. Whatever we are going to do must be done after looking into the laws. The laws can make it right or awfully wrong. So let’s have a look at the law relating to the cousin marriage.

What Law Says about Cousin Marriage

Alas! Law says nothing about Cousin Love. Even the law doesn’t even used the word cousin in the first place. In India, there are two Marriage Laws, The Hindu Marriage Act, 1955 and Special Marriage Act, 1954. Both laws have virtually made a prohibition on the Cousin Marriage.

Few of you folk might not know what a prohibition is. In law, prohibition means something that should not be done. But there are exceptions. In India Dowry Prohibition Act has been laid down but 99.9% of Indian Marriages are done with Dowry. In the same way, Hindu and Special Marriage Act has laid down a term named “Prohibited Degree of Relationship”.

This Degree of Relationship exists only in Hindu, Sikh, Jain and Buddhist. There is an exception to this Prohibition is the customs of the family, religion, sect or society permits the cousin marriage. Our question is who are they to decide who should marry who?

The Younger generation is sensitive, angry, fool, smart all at the same time, but one thing about the younger generation is better than the last, younger generation cannot tolerate a wrong doing like their ancestors did. Though the Youngsters have their right to choose who they want to spend their life with, they should not ignore the law. At least, the younger generation should understand the law before taking their brave steps. When all the door is closed, the law remains a way to achieve the truth. That why awareness about the law is absolutely necessary. Please continue to the next post:-

Legality of Cousin Marriage and the big friction-Part-2

How Cousin Love and Cousin Marriage became taboo?

Cousin Marriage is controversial, but why?

Legality of Cousin Marriage between Hindu couples is very much controversial in India. Most of the people do not want to talk about it. However, just because you don’t wanna see something doesn’t mean it does not exist. A whole generation is asking questions and here are some answers. The problem with the legality of Cousin Marriage starts with Prohibited Degree of Relationships.

What is Prohibited Degree of Relation?

Well, way back in 1955 lawmakers of our country were not so open minded. They were fighters, true, but most of them were fighters for land and recognition. Don’t get me wrong. I truly respect the guys who took us from one sh***ole and dropped us in an another one, but I truly hate the people who never tried to fix the things they should have in the first place. Anyway, while creating the Hindu Marriage Act they wanted to limit the definition of marriage. To make sure that the Hindu Marriage Act stays different from the Muslim Law and others, they created the degree of prohibited relationship. Few founders of our nation were the fundamentalist to their guts. The Prohibited Degree of Relationship contains 33 Relationships that cannot Marry to each other. From Father-Daughter and Mother-son to few generations of your parents cannot marry among each other.

Full list of Degrees of Prohibited Degree of Relationship

Why did they do this?

The question should be why we are still doing this. But history prevails the truth.

Let’s go back few decades and look at general India family structure. What do you see? There would be only one thing persisting in the face, JOINT FAMILIES. For the confused folks, Joint Families are the institution where people for same ancestral lineage co-exist in the same house. In such families, the wealthiest man is the strongest one and oldest one is the Supreme One. Back in the time, when Joint Families existed everywhere, the people of same ancestral lineage lived in the same house, so did their kids.

In our Indian Culture we believe in planned breeding… wait a minute, it is not the right word, we believe in Controlled Breeding. Controlled Breeding is same like dog-breeding in the pet-store. If you wonder that I’m wrong, go and look into a matrimonial page of any newspaper. Yep, that’s controlled breeding where only the masters can decide with whom their dogs… I mean kids, can sc**w. That’s not as same as controlled breeding in reality because we have exceeded 120 Crore in number but our quality is as usual sub-standard.

Anyway, in such scenario where we only worry about who is born but not what they will become, the kids in the same house may exceed too many in number.

Somehow, most parents succeed in ramming one fact down their kids throat that everyone they see is their brother/sister. We call each other brother and sister and that’s not bad at all. Better if our kids have these feeling in their heart (somehow that will control our population crisis, everyone is brother-sister means no breeding). It is the same thing happened with our parents. They used to call each other brother and sister even though there wasn’t any true blood relationship between them at all. Till this, there is no problem. Somehow, parents believe that because they were brothers their kids should also treat each other as brother and sister.

In the back age, when cousins lived together till their adolescence the fact that they are brother and sister sink in and digested. Somehow, now when families have been disintegrated and everyone lives far from each other, sometimes truth weigh more than the made out fact, i.e., COUSINS ARE NOT BROTHERS AND SISTERS.

But this is not the end of story. There is still friction between old and young. That’s why there is devil’s like Lover Killing/Female Genocide (maliciously called Honor Killing). But just claiming something doesn’t make it right. There is an explanation of how cousins are not brother and sister.

Legality of Cousin Marriages and the big friction-Part-3

How to marry Cousin Love legally?

Marrying cousin love legally is the matter of patience and power. In this case, knowledge and money are the two essential powers you can have. The problem cousin lovers face is prejudice. The world is fairly unfair with cousin lovers. In the last two posts of this series, we discovered how our ancestors have fed us with the notion that cousins are brother and sister. It is not true, truth is completely different from what they have taught us. It is really necessary if we clear ourselves with the truth.

Who are brother and sister?

Brother and sister mean a person of opposite sexes, born out of the same mother. In this case, if your mothers are different but the father is same, then you are step-relative, even then you are not true brother-sister at all. That why there is notion like a real brother and the cousin or step-brother/sister. This is a true hard fact to sink in after ages of lies. The person who has not born out of your mother’s womb is nothing to you. Take your time, folk, the fact will sink in with difficulty. Our ancestors have used lies to bend the truth that’s why they were Hypocrites.

This is the depth of our problem!

It all because of money. Yes, folks, it is all because of money. Back in time, when people started earning property they also figured out a way to keep the property to themselves. Though they died but they made a law that the property will be transferred to their blood relatives. If a person dies issueless (without any offspring or child), his/her property will be divided to the next close person in his/her ancestry. Means, if I die without a child, my property will be transferred to my sister/brother and if I’m the lone survivor of my parents, the property will be transferred to the kids of my uncle/aunt.

This system has a particular flaw that has hooked up with the society. Because the property normally transferred to the brother-sisters, we have recognized our cousins as brother and sisters. That’s why there are words like cousin-brother and cousin-sister, but the truth is THERE IS NO SUCH WORD LIKE COUSIN-BROTHER OR COUSIN-SISTER, THERE IS ONLY COUSIN.

So how can I marry cousin love legally?

Depends on by which way you decide to marry your cousin. Since the law has made a prohibition, it also made an exception. The marriage law has accepted any marriage that goes on with the customs of your community, group, caste, creed, and family. IF YOUR PARENTS GIVE THEIR CONSENT ON YOUR MARRIAGE YOU CAN CLAIM IT AS A VALID MARRIAGE. Remember, customs can be made. All it requires a good money in your pocket and right words with your parents. Otherwise, you can go away and start a new family.

What happens if my parents raise an objection?

Well, in such case you cannot marry with your cousin. It is really a s***ed-up country we are living in, guys. CONSTITUTION HAS DENIED US RIGHT TO CHOOSE LIFE PARTNER. That’s the way it is. Most politicians in our country are basically criminals, frauds and illiterate (saving for few left out of the most). Only a few people might know that in the month of October 2008 LAW COMMISSION RECOMMENDED REMOVAL OF COUSINS FROM DEGREE OF PROHIBITED RELATIONSHIP (report No. 212). The Government worked but Politicians slept in their comfortable Government funded Houses.

The bottom line is Cousin Marriages are prohibited ab initio, but hey Dowry is also prohibited, right? So you can marry your cousin but better make your parents ready for this. At least, make sure that they won’t interfere with your happy married life.

Please read out the last post of this series:-

How to convince parents for marrying Cousin love

How to convince your parents for cousin love marriage?

No matter how hard the truth is, it always prevails. And the truth is, for happy cousin marriage life you need to convince your parents. However, there are other ways to live happily with your cousin.

It is an old saying:-

 Whatever doesn’t kill you, makes you stronger.

People are dying to get married. Alas! Same goes with the lovers. But those who has gone far above the basic of human mentality doesn’t care if the marriage ever happens in their life. In the same way, if you are dying to get marry with your cousin, maybe you’ll be dead someday somehow. The thing is, never succumb to basics and you can achieve more.

First of all, before you convince your parents for cousin love marriage, you need to face the truth that your cousin is not your sister/brother and you’ll openly tell this to everyone on their face. If they threaten you with the law that prohibits cousin marriage, tell them that you don’t care. But this will happen only when you go above marriage thing, and believe me, this will make you stronger. The Legality of Cousin Marriages is a problem existing only between Hindus, Jains, Sikhs and Buddhist. The major religions in the world don’t have such restriction. However, when there is a problem, there is a remedy.

It’s simple guys, follow the truth!

Yes, guys. Though, cousin marriages are prohibited and that simply means that you cannot have a marriage certificate from the Marriage Registrar Offices of the country (same doesn’t apply to foreign marriage registrar offices). However, you can live as long as you want to live with your cousin. You can have kids, have a family, have your house and etc. In short, the marriage has no value if you have enough love, money and broad mind. But if you’re not convinced with living-in-relationship, we have a breakthrough solution.

Invite your parents to your marriage, convince your parents

Here you go. This is the brave people stuff, so scaredy cats can go back, curl up into a ball and sleep to the end of the world.

Before everything you do with moving ahead in love life, have money making career in your pocket, enough bank balance to start afresh, bravery which won’t end and of course, the love which has passed all subtle tests of love. If your lover is not financially independent like you then ask your lover to be financially independent and even help him/her. There are many ways to test your love and some of them are really helpful.

Know How to test if your lover loves you most!!!

The thing is, in love your own commitment matters more over the commitment of your lover. Anyway, you’ll love him/her, even if he/she won’t. My advice, if your lover has truly loved you for a once is your long relationship, pursue him/her to the end of your life. If it is one-sided love (under any situation), just ask him/her if he/she feels the love for you (finish the suspense).

The hardest task on the whole planet is becoming financially independent. Nowadays, it is even harder. Meanwhile, your lover is building his/her career, you do same with yours. If your lover is already earning member, he/she must help you to become one too, this is what lovers suppose to do. Remember, if the parents show any violent behaviour, you can immediately leave with your lover.

P.S. Anyone reading this post must read LAWFUL SAFETY GUIDE FOR ELOPING LOVERS

But better safe than sorry!

Conclusion

Whenever I look at love lives I find one thing:-

“Love is not an act or a status, it is life and life is hard.”

Yes, folks, you can live-in-relationship with your cousin but you should get ready for any kind of lawsuit against you. In current time, parents have grown di*ks themselves, literally (one of them actually possess one). Parents are not even ashamed to lodge false rape case against you if you marry to their daughter. However, when there is a problem, there is a solution.

Though constitution does not allow you to choose your soulmate, you can live with him/her without interruption. If somebody threat your personal liberty that you can file a writ petition under article 226 of Constitution of India for stopping the arrest of your lover and show courts that you willingly took his side and do not want to live with your parents anymore.

Author’s Advise-Cum-Disclaimer to Cousin Lovers

If you are a woman and wants to marry your cousin, that’s all right. But be sure of few things:-

  • You are financially independent. Before anything, make this for sure.
  • You are brave to face any situation.
  • You have to test the love of your partner. Remember, people always betray those who trust them. Never be naive.
  • You are mentally and physically strong enough to save yourself from general situation. There are people looking for a weak woman for making her suicide bomb and/or sex worker. Never trust someone you haven’t known deeply. And also, keep knife or paperweight for your protection. If you don’t have them you can easily find a stone or something like that from nearby. Don’t worry, you can even kill someone to protect yourself.

Read: – You have right to protect yourself

  • Make sure to have a good lawyer in touch. If you are planning to leave your parents house, secretly or independently, you may likely to file a writ petition for peaceful life in your future.
  • Make sure to have contact with other lovers in the world and also in the nearby places. In the technology prominent that’s not hard to find, is it?
  • Anything that came up in your head to make your own safety should be done at once. Remember, your enemy only needs your ignorance to harm you. In this case, your enemy, who are your own relative, know you better and can hurt you worse.

Be safe, be lawful and keep loving!!!

Why there is too much corruption?

Education is something we should carry after we left our schools.

Above noted quotation is the bare-naked truth. Education is not to be taught but to be learned and earned. But how could a book-hater kid can learn or earn any education at all? No wonder why we hear news about angry kids beating his school-mates to the pulp. It is quite wondrous how 8 hours of school literacy fails to educate kids, but succeed in teaching how to kill people with their bare-little-hands. Right now, most of our schools are pitch battleground for school children to climb on the top of their communities food chain.

Education is what remains after one has forgotten what one had learn in school.

Sir Albert Einstein needed not to be a genius to figure out the above-noted fact. He was a man with an IQ below room temperature, but he used 0.0001% brain and it made him the creator of E=mc2. It’s quite sad and amusing, how high IQ students of our prestigious engineering colleges are committing to suicide because of failure while Sir Albert Einstein survived with his little IQ. What are we lacking?

Corruption churns everything and spits nothing.

Last one line is from me. In India (and also other lawful countries) corruption is rampant. This little devil hasn’t left a single spot on earth. Corruption has given birth to bureaucracy which has given birth to more corruption. Same bureaucracy is responsible for slow employment rate. Lack of transparency in the IT Age, the high illiteracy graph, dirty governmental hospitals, rampant police brutality, criminal’s supremacy are forms of corruption. But isn’t there any measure against the corruption?

Yes, there is! Law Education is the one-stop-solution for corruption.

Law Education is the medicine of corruption at every level. All your answers are within laws. But what are laws? Have you ever read about any law at schools? I guess not. This little problem has given birth to a devilish situation. Read our next eye-opener story:-

Result of insufficient Legal Awareness!!! 

Open Letter that set our mind on fire :-|

Well, guys, I forced myself to rewrite this article. Have you read the news about Chetan Bhagat writing the letter to youths of Kashmir and Kashmiri Youth firing back open letter? It is only a start. There are many open letters to Mr. Bhagat. Well, the open letter is something we only do with Mr. Chetan Bhagat. But what really disturbed me is how the simplest communication can give birth to most difficult matters.

For those who don’t know what this is all about:-

Youth in NIT Kashmir celebrated the T-20 India’s loss (I don’t know how they could find time to celebrate something worthless like the Cricket while there are bullets flying right up to their a**). While celebrating the India’s petty loss they forget the civil manner and raised some green cloth with slice of the moon and star on it. Because this green cloth resembles flag of our beloved neighbor country (okay, it isn’t that much beloved, unless you are talking about Karachi Kabab) the blood pressure of many youngsters boiled up to a dangerous level. In response, another group of people raised a tricolor cloth of worth least Rs. 1000/- with a black circle with 12 lines in the middle of it.

After that, they divided their teams and a wrestling program was organized. Somehow, Indian Army was called to enjoy this wrestling program and everything turned upside down. As every extreme activity in Kashmir is suspected of terrorism (don’t you dare to run on the streets over there), the Army thought to start their routine shooting drill. This incident left 5 people dead and the media ultimately got something to show on their channel beside Baba Ramdev’s new product advertisement.

Now, while the news was going viral, Mr. Chetan Bhagat probably got upset for dead Kashmiri boys. He opened his pen… no, he opened his iPad, iPhone, iMac… hell, I don’t know what he uses to write his novels. So, he opened his ‘writing tool’ and wrote an open letter to the general youngster of Kashmir, addressing the blood pressure problem between them. He started with a history lesson about how we get stuck with Kashmir’s problems. He told them how this annexure process went wrong and half of the state fell in the hand of Pakistan and China. After this History lesson, Mr. Bhagat started telling them the benefits of becoming a part of India (without knowing that Kashmir is already part of India by virtue of its’ Constitution).

Then Mr. Bhagat opened his web browser, composed the letter it into an email and fired it in as many directions as possible. Quickly, this letter got published on various blogs and newspapers around the world. Ultimately, SHEIKH USMAN @sheikhmdusman gets this letter, had time to read like most of us, and wrote and open letter to Mr. Chetan Bhagat.
In this letter, this SHEIKH USMAN @sheikhmdusman repeatedly wrote about the atrocities done by Indian Army. He wrote about the rape cases, the molestation case and etc. For some time, it caught my nerves. I started to think that this whole world is a real shithole for everyone. Out of interest, I opened my borrowed laptop (pretty pre-historic like iPhone 5S) and started to write bad stuff about Indian Army. Luckily, I thought to read Mr. Bhagat’s letter and like I said, I forced myself to rewrite this article.

Let’s see what was Chetan Bhagat’s Letter (as seen on TIO website):-

Dear Kashmiri friends (the ones who don’t like India),
I write in this open forum because something terrible is happening in the Kashmir Valley. The recent events at NIT Srinagar only brought the situation to national attention. Some students burst crackers when India lost the T20 semi-final. Many students were beaten for raising the Indian flag. Thereafter, bloody clashes have broken out in north Kashmir.
I understand that there is little pro-India sentiment amongst locals in the Kashmir Valley. Many would rather the Valley be on its own, some wouldn’t even mind being with Pakistan. I will not judge you. Despite being a patriotic Indian, i won’t hold it against you if you hate India. You must and do have your reasons for it.
However, allow me to present another point of view. Allow me to tell you how your future will be best, on a practical basis, if the Kashmir Valley integrates and assimilates with India. This is not an emotional, political or historical argument. It is simply more rational for people in the Kashmir Valley who seek a better future to do it with India.
Sure, the experts will jump on me now. Experts who have made the Kashmir problem their fiefdom. However, if the problem were indeed solved, how will these people stay relevant? Hence, they always attack any solution with their elitist ‘this is too complicated an issue’ stance. They love complicated. It gives them another conference to attend. You suffer with complicated, as the problem never gets solved.
The issue is complicated for sure. For those who don’t know the Kashmir issue, here it is in a nutshell. India became independent. Princely states were assimilated. Jammu & Kashmir didn’t accede. Pakistan attacked Kashmir, took half of it (and still controls it). Kashmir’s ruler called India for help. In return for help J&K became part of India, but with riders.
J&K would have its own constitution, have more political independence than other states, while the Centre would handle defence, foreign affairs and communications. In theory, it was a good solution, a sort of one country, two systems approach. In reality, it never worked.
Instead of two parents as planned, J&K became nobody’s child and an orphan. Pakistan took advantage and used the common factor of Islam to start a militant movement. The Indian army tried to control it. However, it is difficult to control terrorism that co-exists with a civilian population (case in point: even the world’s superpowers appear unable to control Islamic State).
Hence the Indian army, and India, only got a bad name in the Valley. Thus the ‘we hate India’ slogans and perennially unsolved Kashmir problem.
The question is, what is a Kashmiri youth to do now? First, it is important for everyone, not just Kashmiris, to understand the area and people involved. The J&K map we see in Indian textbooks is far from what exists on the ground. Half of what we see in the map is taken over by Pakistan and China. Even though India may claim it, unless we are okay with heavy civilian casualties (which we are not), we will never get it.
Hence, let’s just focus on the half under Indian control, which can be divided into three areas: Ladakh, Jammu and the Valley. Most of the trouble is in the Kashmir Valley. This is only around 7% of the area Indians see on the J&K map and approximates the size of Manipur. In terms of people it is 7 million, roughly the population of Chennai.
The terrain is rugged and the area is completely landlocked. Even if we were to indulge the argument that India is a terrible country and so Kashmir Valley should be on its own, can you really build a sustainable country out of it? It will be a tiny stub in a troubled area, abused by both India and Pakistan. With no real economy and extreme dependence on its giant neighbours, it risks becoming a cesspool of terrorism, drugs and smuggling.
There is also a risk of its being taken over by fundamentalist Islamic forces. It is unlikely anybody from outside would invest money in such a dangerous place. There would be no jobs and no safety. Would you want to live there? Ditto if it joins Pakistan. India is seen as a major emerging market economy. Pakistan is not even seen as a real economy.
Another issue is women’s rights. Half of the Valley’s people are women. Given the hold of fundamentalist Islam, their rights would be curbed under both the independence and Pakistan options. This half of the population would be better off with India. Or do what women want not matter?
If you are Kashmiri and care for Kashmir, the best thing you can do is to integrate with India. Your population size is small, only 7 million. It is not unthinkable to unite them and create a group of people that talks real business with the Indian government. Your local politician won’t talk assimilation, as he or she would rather hold more power than a typical state government in India. However, for you, the youth, the best bet is to make the Valley truly part of India.
The rest of India should not ask for the removal of Article 370. The 7 million people in the Valley should. Kashmiri Pandits who were made to leave the Valley need to be brought back. Terrorism is no solution, nor revenge and retribution for Indian atrocities. Terrorism is only going to harm people in the Valley most.
So, it is youth in the Valley who have to now start a movement to really solve this problem. Get rid of Article 370. It is not empowering Kashmir. It is only empowering your local politicians, who frankly can do nothing for you without Indian integration.
Don’t blame the Indian army. It has the tough job of weeding out terrorists from a civilian population which is almost impossible without collateral damage, terrible as that might be. However, blame those truly responsible, the Pakistani army, the local leaders who exploited the situation and the experts who did nothing for you.
Don’t burst crackers when India loses. Don’t feel good when India fails.
Because if India fails, you will fail too.
Jai Hind. Jai Kashmir.
DISCLAIMER : Views expressed above are the author’s own.

This letter caught the controversy. Many of the columnists were throwing stones on Mr. Chetan Bhagat, literally. While someone invited Chetan Bhagat to live in the Kashmir for few days others gave all their sympathies to Kashmiris and told him not to defend India. While Mr. Chetan Bhagat has telling how the thing can be better, Mr. Sheikh Usman thought that only way to get better is by getting separated. Of course, things will always get better with separation but this is not same in the matter of nations. Look at Pakistan. Although, I think we are safe by getting separated from them because the poison Pakistani natives are being fed with is going to consume them. The same poison of orthodoxy is being fed to Indians but we are little more impervious to that.

One particular thing I noticed that Mr. Sheikh Usman has pointed out too many valid points. Indian Army personnel on the border are indeed getting insane. There is rampant corruption inside Indian Army and it’s being consuming the sanity of our Army personnel. Also, there is a rough environment inside and outside the training of Army man which left a bad impact on many army men. There is no denial that whatever Army does it the act of Government. If Indian Army is no longer capable of carrying out its job then the Union of India should admit more native Kashmiri Youth inside our Army so they may know how to protect themselves. Otherwise, we can make separate lawful Army of Kashmiri natives so they can start gathering knowledge of Army and start defending a nation they are with for so long.

The government must admit to the fact that there is a feeling of despair everywhere. In this situation, Kashmiris should start opening their views to the Union of India directly. This is media age and it will be like this forever. Now, a message in a little island can become viral news on the internet.

Separation was once a very easy task. It only took a handful people in a non-civilized and lawless state to divide it into millions of pieces but same is not with India. A separation in today’s world is very difficult, especially when the Government is being prevented from working by its’ opposition. I can tell you what will happen if the Government even tries to free Kashmir from the Union of India.

The proposal will be sent to the Parliament and there will be a riot inside the house, literally. We know what kind of Politicians we have in our Parliament. There will be huge cry inside the media and the Government will be pictured as a devil. The Politicians who don’t even know the exact population of Kashmir will start crying for it and the proposal will finally get inside the dustbin. There is no doubt that India is full of corruption. Kashmiris think that getting separated from the Indian territory will solve their problems. Maybe it will, but there is right now no way to achieve that.

It is quite a shame for Asia that while the west is uniting its’ land and formed the United States of America, we divided ourselves in even smaller land part. Creating more boundaries has never solved any problems, instead, it has created more. Mr. Shiekh Usman was trying to justify Kashmiris violent protest by giving the incidents where the Indian Army did atrocities. Somehow, anger in Kashmiris is valid, so is with the other people living across the country. Every wrong should meet with protest, violent or peaceful. The problem is, violent protest always ends up in deaths of people while peaceful protest always got ignored.

Right now, if an army man is doing something bad to you, you can record it and upload it on Youtube. If there is some problem in the local government, you can surely ask your elected local government to sort it out. Separation is not a measure for getting happiness. It will only make you weak. Smaller your state, sooner you will be enslaved. Mr. Sheikh Usman, according to the law, no Indian can purchase land in Kashmir but Kashmiri man can purchase land in India. We are sure using natural resources from Kashmir but that’s the part of the deal. Don’t you see how coal and minerals are being taken by private companies and sold to people in India? Same way we take things and give something back. India spends billions of dollars to defend Kashmir and you expect the same for nothing in return? That’s not going to happen at any cost.

I know that there are many people who think that we should let Kashmir live on its’ own. But what do you think will happen when we’ll leave Kashmir. Pakistan will feed on Kashmir from one way and Chine from another like they did in Gilgit and Tibet. For Kashmir, going from India to Pakistan is lose and lose situation and getting detached as an independent state is a dying situation.

So, it is now your choice to get separate and create a whole lot of hell or correct what’s bad inside the shell.

Note: Take this article as anything. Humour was the first element before I started writing serious stuff.

सब एक पल में ख़त्म हो गया।

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हम सभी ने प्रत्युषा बैनर्जी की दुखद मौत के बारे सुना और एक ही पल में हम अपना आपा खो बैठे। सबसे पहले हमने राहुल को दोष दिया, उसे कातिल करार दिया और पिशाच तक कह दिया। क्या यह सही है? इससे पहले कि हम इस विषय में कुछ भी कहें हमें ये जान लेना चाहिये कि प्रत्युषा के पोस्टमार्टम के बाद जाँच अभी भी पूरी नहीं हुई है। तो फिर आप होते कौन हैं राहुल को हत्यारा घोषित करने वाले?
प्रत्युषा की मौत से हमारा विश्वास हिल सा गया है, भले इससे पहले हमारे पास किसी तरह का विश्वास रहा हो या नहीं। पहले जिया खान की तथाकथित आत्महत्या और अब प्रत्युषा की मौत। अपने आप से पूछिये, क्यों फिल्म उद्योग में कार्यरत महिलाऐं आत्महत्या से मर रही हैं? जब भी ऐसी कोई दुर्घटना होती है तो सबसे पहले हम महिला के पुरुष साथी पर दोष मढ़ते हैं। हमारे पास कोई तरीक़ा नहीं कि हम उन महिलाओं के दोषियों को सजा दिला सकें, पर हम अपने फ़ैसले ज़रूर सुनाते हैं। कुछ भी हो पर आप इस बात को नजरंदाज नहीं कर सकते कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं।
निम्नलिखित महिला कलाकारों की आत्महत्या जैसे सदिग्ध कारण से हुई थी:-
1. जिया खान

2. नफीसा जोसेफ

3. विवेका बाबाजी
4. शिखा जोशी
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5. कुलजीत राधवाँ
6. रूबी सिंह
7. दिव्या भारती

8. सिल्क स्मिता

9. स्मिता पाटिल

10. आरती अग्रवाल
अब प्रत्युषा की भी मौत आत्महत्या जैसी परिस्थितियों में हुई है। जितनी भी महिला कलाकारों की मृत्यु आत्महत्या जैसी परिस्थिति में हुई उसने परिवारों ने कलाकारों के पुरुष सथियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर दिये। शायद कलाकार ने अवसाद की वजह से आत्महत्या कर ली थी या किसी ने उनकी हत्या कर दी।
हम किसी भी तरह से जाँच पूरी होने से पहले फ़ैसला नहीं सुना सकते। पुलिस का काम होता है किसी आपराधिक मामले की जाँच करना और अदालत का कार्य होता है जाँच की रिपोर्ट को परख कर फ़ैसला सुनाना। लेकिन क्या ये हो पाता है? हम जानते हैं कि पुलिस किस दयनीय गति से कार्य करती है। पुलिस जांच में सालों लगा देती है और अदालत सजा देने में दशकों।अफ़्सोस कि कभी कभी पुलिस पूर्णतः निष्पक्ष जाँच नहीं कर पाती और मामला कभी नहीं निपट पाता। इंद्राणी मुखर्जी के मामले में अभी तक जाँच हो रही है और जाने कब तक चलेगी।
दोषी न्याय व्यवस्था की इन्हीं कमियों के कारण बच निकलते हैं और समाज को संदेश जाता है कि आप हत्या करो और उसे आत्महत्या का रूप दे दो, आप बच जाओगे। जब तक सरकार पुलिस व्यवस्था को चुस्त दुरस्त नहीं करती, पुलिस अधिनियम में बने नेताओं को संरक्षण देने वाले नियमों को ख़त्म नहीं करती तब तक यही होता रहेगा और शायद लम्बी चलने वाली जाँचों में फंसकर प्रत्युषा का मामला भी दब जाये और उसे न्याय नहीं मिले। अगर राहुल दोषी है तो वह सजा का हकदार है पर जिस तरह उसने प्रत्युषा को अस्पताल पहुँचाया (अफ़्सोस कि वो पुलिस को स्वयं फोन न लगा सका) उससे उसके जिम्मेदार इंसान होने के लक्षण ज्यादा है। इसके विपरीत जो उसे अभी से कातिल साबित करने पर तुले हुए हैं उन्हें ये सोचना चाहिये कि किस हक से उन्होंने उसे कातिल साबित किया?

All beauty gone in a flick ;-(

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We all heard the news about the sad death of Pratyusha Banerjee and we all got mad at many things. First of all, we got mad at Rahul who used to live with Pratyusha. Many people have declared Rahul as the murderer and fiend. Is this right? Before we get ahead on this topic we must know that the postmortem has been done and investigation of Late Pratyusha is still under process. So, let me ask you, who are you to declare that Rahul is a killer. Who gave you right to prejudice anyone?

Pratyusha’s death has shaken our belief, even if we didn’t have one before. First Jiah Khan’s supposed suicide and now Pratyusha. Ask yourself, why women in the film industry are dying like this? Few of us had suspected their male partners who lived with them before they died. And rest of us just wait for the investigation to complete. There’s no way to decide who killed them, but you still cannot ignore the fact that women aren’t safe anywhere.

Let me give you a list of female actors who died unnatural dead:
1. Jiah Khan


2. Nafisa Joseph


3. Viveka Babajee


4. Shikha Joshi

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5. Kuljeet Randhawa


6. Ruby Singh


7. Divya Bharti


8. Silk Smitha


9. Smita Patil


10. Aarthi Agrawal

Now Pratyusha has been added to this list by death. Families of most of the deceased female actor have lodge criminal cases against their male partners, but it cannot hide the fact that there is something killing our beauty. Maybe they committed suicide because of depression or they were murdered by someone.

We are in no position to give our verdict, claiming that their male partners are the reason for their death. We can wait for police to investigate and the court will decide how fair their investigation was. But will it give justice to the female who died so young? We know how slow our police is. Police take years to investigate and the court takes years to give punishment. Even after that the accused will mingle with our slow law and will finally get on the plea of the benefit-of-doubt.

There is something we have to admit that something is wrong with our society and our culture. People dies every day, but when somebody so beautiful, well know, kind and humane dies like this, it breaks our heart. So, instead of foolishly claiming that her boyfriend killed her we should ask our government to make some change and ensure that real perpetrator, no matter who he is, should be punished.

Sign our change.org petition for ensuring proper investigation in Pratyusha Banerjee Case

देशभक्ति के प्रमाणपत्र के फ़ायदा

हमारे देश में 120 करोड़ लोग हैं पर हमारे देश में क्या लोग देशभक्ति हैं? होंगे, ज़रूर होंगे पर बाकी सारे लोग कैसे जानेंगे कि आप देशभक्ति हैं? भाई, स्टेटस का सवाल है। आज कल देशभक्ति की मार्केट में वैसे ही क़ीमत है जैसे पहले कभी बाबा लोगों की होती थी।

हो सकता है कि आप देशभक्ति का प्रमाणपत्र न चाहते हों पर जरा जान लीजिये कि देशभक्ति के प्रमाणपत्र का क्या फ़ायदा हैः-

फ़ायदा संख्या 1 – आप कहीं भी देशभक्ति कर सकते हैं। जी हाँ, किसी मंदिर या मस्जिद बनवाने के लिये बलवा, टैक्स की चोरी करना, वोट के लिये दंगे, आरक्षण के लिये मारकाट सब कर सकते हैं और आपको कोई कुछ नहीं कहेगा। अरे आप एक प्रमाणित देशभक्त जो होंगे।

फ़ायदा संख्या 2 – आपकी इज़्ज़त बन जायेगी। जी हाँ, इस देश में गंगा में नहाने से भले 1000 पाप न धुलें पर देशभक्ति का प्रमाणपत्र पाते है 100 ख़ून भी माफ़ हो जायेंगे। कोई भगवा पार्टी आपको पूरा संरक्षण देगी। फ़िर अगर आप किसी को सरेआम गाली दें, किसी को पीटे या हत्या भी कर दें, सब हमेशा माफ़ रहेगी। आपको तो सम्मानित भी किया जायेगा। बस याद रखें, देशभक्ति का राग अलापना है।

फ़ायदा संख्या 3 – आपके विरोधियों का स्वतः खात्मा हो जायेगा। जी हाँ, अगर आपको देशभक्ति का प्रमाणपत्र मिला है तो आपके विरोधियों को देशद्रोही कह कर जेल में ठूंस दिया जायेगा। आप बस अपने घर पर आराम से सब कुछ देखना।

फ़ायदा संख्या 4 – आप स्वतः स्वच्छ हो जायेंगे। नहीं, नहीं। ये स्वच्छ भारत अभियान वाला स्वच्छ नहीं है। वो तो विफल हो गया है। इस प्रमाणपत्र से आपके पुराने सारें कुकर्म छुप जायेंगे। नहीं, नहीं, आपको देशभक्ति करने के लिये फिर स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने की भी ज़रूरत नहीं।

फ़ायदा संख्या 5 – दूसरों पर कीचड़ उछालने पर भी आपके हाथ गंदे नहीं होंगे। जी हाँ, ये हमारा ऐसा प्रमाणपत्र हो जो आपको भले मडप्रूफ न बनाए पर आपके द्वारा किसी दूसरे पर उछाले कीचड़ से आपकी रक्षा ज़रूर करेगा।

तो ये रहे देशभक्ति के प्रमाणपत्र के चंद पर महत्वपूर्ण फ़ायदे। काश, चंद्रशेखर आजाद और भगतसिंह ने देशभक्ति के प्रमाणपत्र की खोज की होती तो उन्हें अपनी जान न देने पड़ती। उप्स, माफ़ कीजियेगा। अगर उन्होंने देशभक्ति के प्रमाणपत्र की खोज की होती तो उन्होंने “Long Live the Queen/King” कहा होता।

Note:- ये लेख तत्काल में चल रही गतिविधियों पर एक व्यंग्य है। कृपया इसे गंभीरता से लें और सोचें कि कौन वो लोग हैं जो देश की समस्याओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे अपने कज़िन प्रेमी से विधिपूर्वक शादी करें।

ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।

यक़ीन मानिये, कज़िन लव में गालिब के ये अल्फाज़ बिल्कुल ठीक बैठता है। कज़िन लव और कज़िन मैरिज में आपको आत्मबल, रुपये, समझदारी और तल्लीनता सब लगती है। यहाँ रुपये और सब्र का खेल ज्यादा है। इस दुनिया में कज़िन प्रेमियों को बहुत पक्षपात झेलना पड़ता है। जहाँ कज़िन प्रेमी अपने दिमाग़ में ठूसे सदियों पुराने झूठ से लड़ते हैं वहीं असल दुनिया में इनके अपने माता-पिता तक इनके सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं। सबसे पहले तो सभी कज़िन प्रेमियों को अपने दिमाग़ से सच के द्वारा एक झूठ साफ़ करना होगा।

भाई बहिन कौन होते हैं?

भाई बहिन वो दो स्त्री-पुरुष होते हैं जो एक ही माँ की कोख से जन्में होते हैं। इस तरह अगर दो बच्चों की माँ एक है पर बाप अलग-अलग हैं तो वो भी सौतेले ही कहलाते हैं। वहाँ भी माँ के एक होने के बाद भी वो सौतेले कहे जाते हैं। ध्यान दें “भाई” और “बहिन” एक संबोधन है जिससे हम किसी व्यक्ति को बुलाते हैं। जब तक संबोधन में भावना न हो संबोधन अर्थहीन ही रहता है। जहाँ एक सच्चे तपस्वी के लिये प्रत्येक इनसान भाई बहिन हो जाते हैं वहीं एक बलात्कारी के लिये भाई बहिन शब्द कोई मायने नहीं रखते। अब एक ही व्यक्ति से पूरी उम्र प्रेम करने का मद्दा रखने वाले कज़िन अच्छे है या पहले से प्रेम होते हुई किसी दूसरे से संबंध जोड़ने वाले व्यक्ति बुरे हैं इसका पता आप भी लगा सकते हैं। यक़ीनन ये सत्य कि केवल माँ की कोख से जनमें दो जन ही भाई-बहिन होते हैं, इसे पचाने में आपको समय लगेगा पर ये ज़रूरी है। पूर्वजों ने कई तरीक़ों से सत्य को तोड़ मरोड़ा है, इसी कारण उन्हें हम दक़ियानूस कहते हैं।

पर इस समस्या की जड़ कहाँ है?

इस समस्या की जड़ है रुपया। जी हाँ, यहाँ भी सम्पत्ति विकृति की जननी है। कालांतर में, जब लोगों ने सम्पत्ति जुटाना शुरु कर दिया तब उन्होंने सम्पत्ति हमेशा के लिये अपने पास रखने का तरीक़ा भी इज़ाद कर लिया। उसके लिये उन्होंने विरासत का सृजन किया। इस तरह वो मर गए पर पीछे अपने बच्चों के लिये सम्पत्ति छोड़ गए। क़ानूनन अगर कोई व्यक्ति बिना संतान के मर जाता है तो उसकी सम्पत्ति उसके सबसे क़रीबी संबंधी को दे दी जाती है।

मान लीजिये, मैं बिना किसी संतान के दुनिया से विदा ले लेटा हूँ तो मेरी सारी सम्पत्ति मेरे भाई/बहिन में बंट जायेगी। ऐसे में अगर मेरा कोई भाई/बहिन न हो तो मेरी सम्पत्ति में चाचा, ताऊ या ऐसे ही किसी व्यक्ति के परिवार में बंट जायेगी।

इस प्रणाली की एक सबसे बड़ी खामी आज भी हमारे समाज को खोखला किये हुए है। क्योंकि साधारणतः सम्पत्ति भाई/बहिन में बंट जाती है इस कारण सभी को ये लगने लगा है कि हमारे रिश्तेदारों के बच्चे भी आपस में भाई बहिन है। यही कारण है कि हमारे समाज में चचेरी-बहिन, ममेरे-भाई जैसे भ्रामक शब्द प्रचलित हैं, पर सत्य यही है कि दुनिया में कोई ममेरा-चचेरा भाई बहिन नहीं होते, वो सब सिर्फ़ रिश्तेदार होते हैं। जब तक स्वेच्छा से भाई बहिन का भाव रहता है तब तक तो सब ठीक रहता है पर जैसे ही ये रिश्ता किसी पर थोपा जाने लगता है, सब बरबाद हो जाता है।

तो क्या कज़िन से विधिपूर्वक विवाह संभव है?

ये निर्भर करता है शादी करने के तरीक़े पर। हिन्दु विवाह अधिनियम में लिखे प्रतिबंध के चलते कज़िन से शादी करना लगभग संभव है।विधि के अनुसार अगर आपके समाज, परिवार, धर्म आदि में से किसी एक के भी रीति-रिवाज़ कज़िन से शादी करने की इज़ाज़त देते हैं तो आप विवाह कर सकते हैं। साफ़ शब्दों में अगर आपके माता-पिता कज़िन शादी पर अपनी सहमति देते हैं तो शादी वैधानिक है। ये हमेशा याद रखिये कि रीति-रिवाज़ नए बनते रहते हैं। आपको सिर्फ़ जेब में रुपए और मुँह में परिजनों के लिये मीठे-मीठे बोल चाहिये। अगर आपके पास दोनों नहीं है तो आप परिवार से अलग होकर अपना नया परिवार बना सकते हैं।

क्या होगा अगर मेरे माता-पिता मेरी कज़िन से शादी पर आपत्ति उठा दें?

ऐसी परिस्थिति में आप की शादी अवैध होगी और अगर आपत्ति शादी के बाद उठती है तो अवैध घोषित कर दी जायेगी। भारत वाकई में एक अच्छा देश है पर इस में भी खामियाँ हैं। भारत का संविधान आपको जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं देता। यही होता आया है आज तक।हमारे देश के ज्यादातर नेता धोखेबाज़, अपराधी और अनपढ़ हैं (मैं ने ज्यादातर नेता कहा है, सारे नेता नहीं)। ऐसे में उन नेताओं से हमें जीवनसाथी चुनने का अधिकार देने की आशा रखना भी बेमानी है।

हम में से कुछ को ही पता है कि अक्टूबर 2008 में लाँ कमीशन की एक रिपोर्ट (Report No. 212) में विवाह विधियों से कज़िन मैरिज पर लगे प्रतिबंध को हटाने की शिफारिश की गई थी। लाँ कमीशन ने अपना काम बख़ूबी किया पर नेता अपने सरकारी आवास में चैन की नींद सोते रह गए।

अंततः जवाब यही है कि कज़िन मैरिज प्रतिबंधित हैं, पर प्रतिबंधित तो दहेज प्रथा भी है। अगर माता-पिता को आप राजी कर लें तो कज़िन मैरिज भी पूरी तरह से वैध हो सकती है। आप कज़िन से शादी कर सकते हैं पर लम्बे संघर्ष के बाद। अगर कज़िन से शादी करना चाहते हैं तो माता-पिता को मना लीजिये। अगर ऐसा संभव न हो तो अपना सामान बाँधिये और घर छोड़ कर जाते-जाते माता-पिता को सीधे शब्दों में कह दीजिये कि वो आपके वैवाहिक जीवन में कोई दख़ल न दें।

हमारी इस श्रृंखला का आख़िरी पोस्ट पढ़िये:-

अपनी कज़िन से शादी के माता-पिता को कैसे राजी करें?

Yes you can kill, but first read this! (Private Defence)

Yes, that’s right, you can kill anyone but there are some strings attached, you must have the right to private defence.

The mother of all penal codes in India, i.e., India Penal Code, 1860, contains 23 Chapter and 511 Sections (few of them are now repealed). Among these 511 Sections, Section 96 to Section 106 are particularly special. The sections were dubbed by Sir Thomas Babington Macaulay as “Right of Private Defence” which is simply a defence for killing someone.

Let’s take a look at these sections:-

96. Things done in private defence.–Nothing is an offence which is done in the exercise of the right of private defence.
97. Right of private defence of the body and of property.–Every person has a right, subject to the restrictions contained in section 99, to defend-
First.–His own body, and the body of any other person, against any offence affecting the human body;
Secondly.–The property, whether movable or immovable, of himself or of any other person, against any act which is an offence falling under the defintion of theft, robbery, mischief or criminal trespass, or which is an attempt to commit theft, robbery, mischief or criminal trespass.
98. Right of private defence against the act of a person of unsound mind, etc.–When an act which would otherwise be a certain offence, is not that offence, by reason of the youth, the want of maturity of understanding, the unsoundness of mind or the intoxication of the person doing that act, or by reason of any misconception on the part of that person, every person has the same right of private defence against that act which he would have if the act were that offence.
Illustrations
(a) Z, under the influence of madness, attempts to kill A; Z is guilty of no offence. But A has the same right of private defence which he would have if Z were sane.
(b) A enters by night a house which he is legally entitled to enter. Z, in good faith, taking A for a house-breaker, attacks A. Here Z, by attacking A under this misconception, commits no offence. But A has the same right of private defence against Z, which he would have if Z were not acting under that misconception.
99. Acts against which there is no right of private defence.— There is no right of private defence against an act which does not reasonably cause the apprehension of death or of grievous hurt, if done, or attempted to be done, by a public servant acting in good faith under colour of his office, though that act may not be strictly justifiable by law.
There is no right of private defence against an act which does not reasonably cause the apprehension of death or of grievous hurt, if done, or attempted to be done, by the direction of a public servant acting in good faith under colour of his office though that direction may not be strictly justifiable by law.
There is no right of private defence in cases in which there is time to have recourse to protection of the public authorities.
Extent to which the right may be exercised.
Extent to which the right may be exercised.–The right of private defence in no case extends to the inflicting of more harm than it is necessary to inflict for the purpose of defence.
Explanation 1.-A person is not deprived of the right of private defence against an act done, or attempted to be done, by a public servant, as such, unless he knows or has reason to believe, that the person doing the act is such public servant.
Explanation 2.-A person is not deprived of the right of private defence against an act done, or attempted to be done, by the direction of a public servant, unless he knows, or has reason to believe, that the person doing the act is acting by such direction, or unless such person states the authority under which he acts, or if he has authority in writing, unless he produces such authority, if demanded.
100. When the right of private defence of the body extends to causing death.–The right of private defence of the body extends, under the restrictions mentioned in the last preceding section, to the voluntary causing of death or of any other harm to the assailant, if the offence which occasions the exercise of the right be of any of the descriptions hereinafter enumerated, namely:-
First.-Such an assault as may reasonably cause the apprehension that death will otherwise be the consequence of such assault;
Secondly.-Such an assault as may reasonably cause the apprehension that grievous hurt will otherwise be the consequence of such assault;
Thirdly.-An assault with the intention of committing rape;
Fourthly.-An assault with the intention of gratifying unnatural lust;
Fifthly.-An assault with the intention of kidnapping or abducting;
Sixthly.-An assault with the intention of wrongfully confining a person, under circumstances which may reasonably cause him to apprehend that he will be unable to have recourse to the public authorities for his release.
101. When such right extends to causing any harm other than death.–If the offence be not of any of the descriptions enumerated in the last preceding section, the right of private defence of the body does not extend to the voluntary causing of death to the assailant, but does extend, under the restrictions mentioned in section 99, to the voluntary causing to the assailant of any harm other than death.
102. Commencement and continuance of the right of private defence of the body.–The right of private defence of the body commences as soon as a reasonable apprehension of danger to the body arises from an attempt or threat to commit the offence though the offence may not have been committed; and it continues as long as such apprehension of danger to the body continues.
103. When the right of private defence of property extends to causing death.–The right of private defence of property extends, under the restrictions mentioned in section 99, to the voluntary causing of death or of any other harm to the wrong-doer, if the offence, the committing of which, or the attempting to commit which, occasions the exercise of the right, be an offence of any of the descriptions hereinafter enumerated, namely:-
First.-Robbery;
Secondly.-House-breaking by night;
Thirdly.-Mischief by fire committed on any building, tent or vessel, which building, tent or vessel is used as a human dwelling, or as a place for the custody of property;
Fourthly.-Theft, mischief, or house-trespass, under such circumstances as may reasonably cause apprehension that death or grievous hurt will be the consequence, if such right of private defence is not exercised.
104. When such right to causing any harm other than death.–If the offence, the committing of which, or the attempting to commit which occasions the exercise of the right of private defence, be theft, mischief, or criminal trespass, not of any of the descriptions enumerated in the last preceding section, that right does not extend to the voluntary causing of death, but does extend, subject to the restrictions mentioned in section 99, to the voluntary causing to the wrong-doer of any harm other than death.
105. Commencement and continuance of the right of private defence of property.–The right of private defence of property commences when a reasonable apprehension of danger to the property commences.
The right of private defence of property against theft continues till the offender has effected his retreat with the property or either the assistance of the public authorities is obtained, or the property has been recovered.
The right of private defence of property against robbery continues as long as the offender causes or attempts to cause to any person death or hurt or wrongful restraint or as long as the fear of instant death or of instant hurt or of instant personal restraint continues.
The right of private defence of property against criminal trespass or mischief continues as long as the offender continues in the commission of criminal trespass or mischief.
The right of private defence of property against house-breaking by night continues as long as the house-trespass which has been begun by such house-breaking continues.
106. Right of private defence against deadly assault when there is risk of harm to innocent person.–If in the exercise of the right of private defence against an assault which reasonably causes the apprehension of death, the defender be so situated that he cannot effectually exercise that right without risk of harm to an innocent person, his right of private defence extends to the running of that risk.
Illustration
A is attacked by a mob who attempt to murder him. He cannot effectually exercise his right of private defence without firing on the mob, and he cannot fire without risk of harming young children who are mingled with the mob. A commits no offence if by so firing he harms any of the children.