कैसे कज़िन लव और शादी वर्जित बन गई?

क्यों कज़िन मैरिज विवादित है?

कज़िन मैरिज न तो अप्राकृतिक हैं न ही असामाजिक। अगर कज़िन मैरिज के विवादित होने का कुछ कारण है तो वो है माता-पिता की युवा पर अंकुश लगाने की ज़िद। दुनिया के चार प्रमुख धर्मों: ईसाई, इस्लाम, हिंदू और बौद्ध में केवल भारतीय हिंदुओं को ही कज़िन मैरिज के समस्या है। इस पर भी केवल उत्तर भारतीय हिंदुओं की ही ये अवधारण है कि कज़िन भाई-बहिन होते हैं। इन में से ज्यादातर इस मामले में बात नहीं करना चाहते, पर सिर्फ़ आपके बात न करने से किसी समस्या का निवारण संभव नहीं। स्वैच्छिक कज़िन मैरिज पर उत्तर भारतीयों का विरोध और विरोध के लिये ऊलजलूल तर्क हास्यप्रद हैं। इस पर युवा भी अब कज़िन मैरिज पर होने वाले विरोध पर सवाल करने लगा है। कज़िन मैरिज पर होते विरोध के समर्थन में भारतीय हिंदुओं के पास केवल एक ही तर्क है – “Prohibited Degree of Relationship”।

क्या है “Prohibited Degree of Relation”?

भारत देश की विधानसभा का एक बहुत घृणित सत्य है, वो युवा को लेकर उदासीन है और दक़ियानूसी भी। बात 1955 में भी देश की विधान रचनाकार दक़ियानूसी थे। भले ही उन में से कुछ ने देश के लिये जान दी हो, पर वो लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन और पहचान की थी। कहना ग़लत न होगा कि उन्होंने हमें एक गड्ढे से निकाला और गड्ढे पर लगी पट्टी बदल कर वापस उसी गड्ढे में डाल दिया। हमें ग़लत न समझे, हम उन तमाम शहीदों को भी नमन करते हैं जिन्होंने हमें अशिक्षा के अंधकार से निकालने की कोशिश तक नहीं की, पर फ़िर भी हमें उन लोगों से रोष है जिन्होंने उन चीज़ों की सही करने की कभी कोशिश नहीं की जिसे सही करने की सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।

कुछ भी हो, जब हिन्दू विवाह अधिनियम बन रहा था तब हमारे देश के कर्णधार विवाह की परिभाषा तय कर देना चाहते थे। ताकि हिन्दू विवाह, मुस्लिम विवाह से, बिल्कुल अलग रहे इसलिये उन्होंने “prohibited degree of relationship” बनाया। इस तरह हमारे आज़ाद देश के कर्ता-धर्ताओं ने देश के सबसे बड़े तबक़े को शादी जैसे संवेदनशील मुद्दे के लिये युवा को समाज और परिजनों का ग़ुलाम बना दिया। उन्होंने हमें तैंतीस प्रकार के रिश्तों में बाँध दिया। बाप बेटी और माँ बेटे से लेकर दूर-दराज़ के संबंधी तक को विवाह करने से मनाही कर दी गई।

Full list of Degrees of Prohibited Degree of Relationship

पर उन्होंने ऐसा क्यों किया?

उन्होंने ऐसा क्यों किया इसका जवाब उन लोगों के साथ उनकी कब्र में जा चुका है। फ़िर भी हम इतिहास से सत्य की खोज कर सकते हैं।

चलिये, कुछ साल पीछे जाइये और भारतीय परिवारों की संरचना देखिये। आपका क्या दिखता है? सिर्फ़ संयुक्त परिवार। जिन्हें संयुक्त परिवार के बारें में नहीं पता वो जान लें कि संयुक्त परिवार में एक ही व्यक्ति की कई पीढ़ियाँ एक-साथ निवास करती हैं। ऐसे परिवार में सबसे अमीर सबसे ताकतवर होता है और सबसे बूढ़ा सबसे सम्मानित। जब संयुक्त परिवार होते थे तो एक व्यक्ति के सारें बेटे एक ही घर में रहते थे, साथ में रहते थे उनके बच्चे।

भारतीय संस्कृति में हम नियोजित प्रजनन में विश्वास रखते हैं… जरा एक मिनट रुकिये, नहीं ऐसा नहीं है, हम नियंत्रित प्रजनन में विश्वास रखते हैं। नियंत्रित प्रजनन उसी तरह है जैसे बेचने के लिये घोड़ों की होती है। अगर विश्वास न हो तो अखबार का ‘परिणय’ पृष्ठ (Matrimonial Page) निकालिये। जी हाँ, इसी को कहते हैं नियंत्रित प्रजनन। यही वो तरीक़ा जिससे लोग अपने घोड़ों… मेरा मतलब है अपने बच्चों के लिये रात-का-साथी ढूँढ़ते हैं। अगर ये नियोजित प्रजनन होता तो हम 120 करोड़ न हुए होते। हालाँकि, हम 120 करोड़ हैं पर हमारी दशा क्या है? शायद ये सोचने की ज़रूरत है कि आपके पूर्वज अगर मध्यमवर्गी थे तो आप भी मध्यमवर्गी क्यों रह गए?

आज ही की तरह, संयुक्त परिवार में भी बच्चे संख्या में अपने माता-पिता को पछाड़ देते थे। एक जोड़ा रातों-रात सात-सात बच्चों की पूरी टोली बना लेता था।

किसी तरह, ज्यादातर परिजन एक अवधारणा को हर बच्चे के हलक के नीचे उतार देते थे कि जिससे भी वो मिलते हैं वो उनके भाई-बहिन हैं। उन्होंने एक दूसरे को भाई-बहिन कहा, इसमें कोई बुराई नहीं। अच्छा होता अगर बच्चे उसे दिल से मानते (इस तरह देश की जनसंख्या इतनी भयानक न हुई होती, सब भाई-बहिन हुए तो कोई प्रजनन नहीं)। हक़ीक़त में ये बच्चों के माता-पिता के साथ भी हुआ था और दादा-दादी के साथ भी। सबको एक दूसरे का भाई-बहिन बताने की काम किया जाता था। वो एक दूसरे को भाई-बहिन मानते थे भले उनके बीच रक्त संबंध रहा हो या नहीं। यहाँ तक कोई समस्या नहीं थी। समस्या तब शुरु हुई जब माता-पिता ने ये सोचना शुरु कर दिया कि अगर हम किसी रिश्तेदार को भाई-बहिन बोलते हैं तो उसके और हमारे बच्चे भी आपस में भाई-बहिन होंगे।

कालांतर में, जब कज़िन्स (रिश्तेदार) साथ रहते थे तो वो भी यही समझते थे कि वो भाई-बहिन हैं। आज, जब परिवार बिखर चुके हैं और सब दूर-दूर रहने लगे है तो एक सत्य उस अवधारणा पर भारी पड़ गया हैः – “रिश्तेदार भाई बहिन नहीं होते।”

पर यहाँ कहानी ख़त्म नहीं होती। अब सत्य और अवधारणा के बीच में घर्षण होने लगा है। इसी लिये प्रेमी हत्या (जिसे लोग कुटिलतापूर्वक Honor Killing का नाम देते हैं) अस्तित्व में है। लेकिन सिर्फ़ कुछ बताने से समस्या का निवारण नहीं होता। हमें ये सत्य समझना होगा कि चाचा के बच्चे, मामा के बच्चे, फूफा के बच्चे आपस में भाई-बहिन नहीं, वो सिर्फ़ रिश्तेदार हैं।

इसी श्रृंखला का हमारा अगला लेख पढ़ियेः-

Legality of Cousin Marriages and the big friction-Part-3

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