कज़िन लव और कज़िन मैरिज का वैधानिक पहलू…

कज़िन लव और कज़िन मैरिज पर उठते सवालों का जवाब

कज़िन मैरिज, भले ये अंग्रेजी का शब्द हो पर इसके बारे में हमारे देश का हर व्यक्ति जानता है। हमारे देश में कज़िन को चचेरे, ममेरे, फुफेरे भाई बहिन के नाम से बुलाया जाता है। इस पर भी कुछ वक़्त से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ कज़िन ने आपस में शादी की है या वो शादी करना चाहते हैं। यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या जिन्हें सभी भाई-बहिन बताते हैं क्या उन के बीच में शादी होना ठीक हैं?

हमारे देश में शादी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। चाहे हिंदू हो या मुस्लमान, हर किसी को शादी के आगे कुछ दिखाई नहीं देता है। ऐसे में शादी से संबंधित सारे फ़ैसले लेने का जिम्मा सिर्फ़ पिता उठाना चाहता है। भले बाल विवाह की प्रथा को समाप्त मान लिया गया हो पर पिता की मर्जीं पर ही शादी होना बाल विवाह का ही रूप है। ऐसे में कज़िन मैरिज पर बहस ही नहीं होनी चाहिए। परंतु क्योंकि प्रत्येक चीज परिवर्तनशील है इस कारण इसके बारे में जानना अति-आवश्यक है।

देश में कज़िन को भाई-बहिन मानने वालों का यह भी मानना है कि कज़िन मैरिज प्रकृति के विरुद्ध है (हमेशा की तरह आदमी ही तय करने लगा है कि प्रकृति के विरुद्ध क्या है और क्या नहीं)। मनुवादी सभ्यता में जहाँ औरत को घर में कैद करके रखने का अथक प्रयास होता है वहाँ कज़िन मैरिज पर कई तरह के प्रतिबंध लगना सामान्य है। पर हमारे देश में सब कुछ विधि के द्वारा चलता है तो हमें विधि के बारे में भी जान लेना चाहिये। भले समाज की इस विषय में जो भी अवधारण हो पर समाज के पास उसका ख़ुद का कोई दिमाग़ नहीं (तभी तो समाज में तर्कों का कोई स्थान नहीं)।

विधि में शक्ति होती है और विधि में लिखी कोई भी बात किसी सही बात को ग़लत बना सकती है और ग़लत बात को सही भी। आईये जानते हैं कि विधि कज़िन मैरिज के बारे में क्या कहती है।

कज़िन मैरिज पर विधि

अफ़्सोस, विधि कज़िन मैरिज के बारे में कुछ नहीं कहती। यहाँ तक की विधि में कज़िन शब्द का प्रयोग भी नहीं किया गया है। भारतवर्ष में दो वैवाहिक विधियाँ हैं, हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 और विशिष्ट विवाह अधिनियम, 1954। दोनों ही अधिनियम में ऐसे प्रावधान है जिससे कज़िन विवाह पर प्रतिबंध सा लग गया है।

आप में से कुछ बंधु प्रतिबंध का वैधानिक अर्थ शायद न जानते हों। क़ानूनन प्रतिबंध का मतलब है कि आपको कुछ नहीं करना चाहिये। परंतु प्रतिबंध में हमेशा कुछ अपवाद होते हैं। भारत में दहेज प्रथा पर प्रतिबंध है पर 99.9% शादियां दहेज के साथ होती हैं। इसी तरह भारत के विवाह अधिनियमों में  “Prohibited Degree of Relationship” का उपयोग किया गया है।

“Prohibited Degree of Relationship” केवल हिन्दू, सिक्ख, जैन और बुद्ध समुदाय पर ही लागू है। इस “Prohibited Degree of Relationship” के हिसाब से पिता की पाँच पीढ़ियों और माता की तीन पीढ़ियों के बीच में विवाह नहीं होना चाहिये। परंतु अगर सामाजिक रीति और रिवाज़ या पारिवारिक रीति-रिवाज़ कज़िन मैरिज को लेकर सहमत हैं तो कज़िन आपस में शादी कर सकते हैं। इस पर युवा का एक बहुत जायज सवाल है – “समाज या परिवार कौन होते हैं ये तय करने वाले कि हम किस से शादी करें?”

युवा पीढ़ी एक ही वक़्त पर संवेदनशील, ग़ुस्सैल, मूर्ख, समझदार सब होती है। तिस पर भी युवा की एक बात बहुत अच्छी है, वो अपने पूर्वजों की ग़लतियों को दोहराने में विश्वास नहीं रखते न ही उनकी तरह किसी रीति-रिवाज़ को बिना सोच विचार के अपनाते हैं। यहाँ एक ओर युवा को ये पूरा हक है कि वो अपने पसंद के जीवनसाथी के साथ रहें पर वो भी विधि को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते। कम से कम युवा को तो किसी भी तरह के साहसिक कदम को उठाने से पहले विधि को ज़रूर जान लेना चाहिये। जब सारे दरवाज़े बंद हो जाते हैं तब विधि और न्याय ही आख़िरी रास्ता बचता है। विधि के विषय में जागरूकता बहुत ज़रूरी है।

कृपया इस श्रृंखला का हमारा अगला लेख पढ़े:-

कज़िन लव मैरिज पर इतनी आपत्ति क्यों?

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