संवैधानिकता क्या होती है?

आपने सुना तो होगा ही कि सर्वोच्च न्यायालय धारा 377 की संवैधानिकता जाँच रही है। सवाल ये उठता है कि क्या होती है संवैधानिकता और इससे क्या होगा? आईये, जानते हैं।

संवैधानिकता का अर्थ

संवैधानिकता देश में लागू हर एक विधि और नियम का अंतिम परीक्षण है। किसी विधि या नियम के देश में लागू होने के लिये उसका संवैधानिक होना अतिआवश्यक है। इसी कारण जब भी विधानसभा कोई नई विधि बनाती है तो न्यायालय इस बात का ध्यान रखती है कि विधि संविधान के मुताबिक लागू हो। संविधान के कारण ही पुलिस और सरकार तक विधि को मानने के लिये बंधे होते हैं।

संवैधानिकता से ही किसी विधि के ठीक होने का पता चलता है। परंतु फ़िर भी विधि कई तरीक़ों से ग़लत हो सकती है। जब भी हम समलैंगिक जनों पर धारा 377 के चलते होते अत्याचार की ख़बरें पढ़ते हैं तो ये समझ आता है कि संवैधानिक घोषित विधि में भी खामियाँ हो सकती हैं।
संवैधानिकता के मापदंड क्या हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 में लिखा है –

Article 13

ऊपर दिये अनुच्छेद से ही किसी विधि की संवैधानिकता का पता लगाया जा सकता है।

कुछ शब्दों में, जो भी विधि मूल अधिकारों के अनुकूल नहीं है उसे अस्तित्व में नहीं रहना चाहिये।

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