आपको भी मिलेगा देशभक्त होने का प्रमाणपत्र

कितने ही साल लग गए हमारे देश के पूर्व नेताओं को देशभक्त होने का तरीका खोजने में। कुछ ने तो आजाद रहने के लिये ख़ुद को गोली तक मार ली। पर अब आपको जान देने की ज़रूरत नहीं अंततः अब खोज पूरी हो चुकी है। वो तरीका खोज लिया गया है जिससे आप देशभक्त बन सकते हैं। आपको देशभक्ति का प्रमाणपत्र पाने के लिये चाहियेः-

  1. आप सरकार के हाँ में हाँ मिलाईये। हाँ, माना कि ये नीति अँग्रेज़ों की शुरू की गई थी ताकि भारत के लोग महारानी की हुकूमत के खिलाफ़ खड़े न हो सकें पर अब वो नीति ही आपको देशभक्त बनाएगी। तो क्या हुआ अगर अँग्रेज़ों ने वो क़ानून ख़त्म कर दिया है? हम तो अपने मन का करेंगे।
  2. किसी सवर्ण-हिंदू-जाति-संगठन के सदस्य बनिये। हाँ, ये ज़रूरी है। पता है भारत में कितने हिंदू हैं? 70% तो ये अगर सारे ग़रीबों को हटा दिया जाए तो भी हिन्दू ही जनसंख्या में अधिक हैं। जल में रहे मगर से बैर न कीजिये। हाँ, हाँ, हमें पता है कि मगरमच्छ के हिसाब से चलने पर भी मगरमच्छ सबको खा जाता है। चिंता मत करिये। जब तक आप हिंदूगिरी के धंधे को बढ़ाते रहेंगे, हम आपकी रक्षा करेंगे।
  3. “भारत माता की जय” कहिये। जी हाँ। क्या कहा आपने? कौन है ये भारत माता? हमें पता नहीं, हमने तो केवल अपनी माँ देखी है। भारत माता भी ऐसी ही एक माता है। अगर भारत माता की जय नहीं बोली तो हम क्या करेंगे? अरे, हम आपको देशदोही घोषित कर देंगे। क्या कहा आपने? आतंकवादी भी अपनी बात कहलवाने के लिये ऐसे ही धमकी देते हैं? अरे हम हिंदू हैं। हिंदू आतंकवाद कहाँ करते हैं? देखिये कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और बलात्कार का मुद्दा बीच में मत लाइये। देश को इस वक़्त सिर्फ़ देशभक्ति की ज़रूरत है। और फिर किसी औरत के जीने-मरने से देशभक्ति का क्या लेना देना?
  4. “राम मंदिर” बनाने में मदद कीजिये। साथ में भगवा वस्त्र पहिनये। और भी कई काम हैं। क्या कहा आपने? अच्छा, देश में बच्चे भीख मांगने को मज्बूर किये जाते हैं? तो हम क्या करें? उन बच्चों की जिम्मेदारी उनके माँ-बाप की है। आप बार-बार ऐसे मामूली मुद्दे देशभक्ति के बीच में क्यों ला रहे हैं? क्या मतलब कि देश में अच्छे अनाथालयों की भी कमी है?

लीजिये, देशभक्ति का प्रमाणपत्र आपका हुआ। देश में कई सारी समस्याएँ हैं, लोगों को वक़्त पर न्याय नहीं मिल रहा, लोगों को जीवनसाथी चुनने का भी अधिकार नहीं, औरतों को आऐं दिन डर-डर के जीना पड़ता है, दहेज के लिये आए दिन एक बीसों औरतें जला दी जाती हैं, पानी के लिये लोग एक दूसरे का क़त्ल करते हैं, बेरोजगारी हर जगह व्याप्त है, असली किसान आत्महत्या करने पर मज्बूर है और नेता-अभिनेता और कारोबारी किसान बन कर चाँदी काट रहे हैं, जनता टैक्स के बोझ तले दबी है, जाने देश का सारा सोना कहाँ जा रहा जिसके चलते रुपये का दाम घट रहा है, इत्यादि-इत्यादि। पर हमें देश की समस्याओं से क्या लेना देना? हमें तो देशभक्ति से मतलब है। मार्केट में अभी देशभक्ति का बोल-बाला है। देशभक्ति बिकेगी तभी तो वोट मिलेंगे।

अरें आप कहाँ चल दिये? आप भी तो देशभक्ति का प्रमाणपत्र ले लीजिये।

क्या कहा? देशभक्ति का प्रमाण पत्र आपको नहीं चाहिये?

आप ग़लती कर रहे हैं, आईये देशभक्ति के प्रमाण पत्र के फ़ायदे बताऐं आपको। देशभक्ति के प्रमाणपत्र के फ़ायदे

Note:- ये लेख तत्काल में चल रही गतिविधियों पर एक व्यंग्य है। कृपया इसे गंभीरता से लें और सोचें कि कौन वो लोग हैं जो देश की समस्याओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

देशभक्ति के प्रमाणपत्र के फ़ायदा

हमारे देश में 120 करोड़ लोग हैं पर हमारे देश में क्या लोग देशभक्ति हैं? होंगे, ज़रूर होंगे पर बाकी सारे लोग कैसे जानेंगे कि आप देशभक्ति हैं? भाई, स्टेटस का सवाल है। आज कल देशभक्ति की मार्केट में वैसे ही क़ीमत है जैसे पहले कभी बाबा लोगों की होती थी।

हो सकता है कि आप देशभक्ति का प्रमाणपत्र न चाहते हों पर जरा जान लीजिये कि देशभक्ति के प्रमाणपत्र का क्या फ़ायदा हैः-

फ़ायदा संख्या 1 – आप कहीं भी देशभक्ति कर सकते हैं। जी हाँ, किसी मंदिर या मस्जिद बनवाने के लिये बलवा, टैक्स की चोरी करना, वोट के लिये दंगे, आरक्षण के लिये मारकाट सब कर सकते हैं और आपको कोई कुछ नहीं कहेगा। अरे आप एक प्रमाणित देशभक्त जो होंगे।

फ़ायदा संख्या 2 – आपकी इज़्ज़त बन जायेगी। जी हाँ, इस देश में गंगा में नहाने से भले 1000 पाप न धुलें पर देशभक्ति का प्रमाणपत्र पाते है 100 ख़ून भी माफ़ हो जायेंगे। कोई भगवा पार्टी आपको पूरा संरक्षण देगी। फ़िर अगर आप किसी को सरेआम गाली दें, किसी को पीटे या हत्या भी कर दें, सब हमेशा माफ़ रहेगी। आपको तो सम्मानित भी किया जायेगा। बस याद रखें, देशभक्ति का राग अलापना है।

फ़ायदा संख्या 3 – आपके विरोधियों का स्वतः खात्मा हो जायेगा। जी हाँ, अगर आपको देशभक्ति का प्रमाणपत्र मिला है तो आपके विरोधियों को देशद्रोही कह कर जेल में ठूंस दिया जायेगा। आप बस अपने घर पर आराम से सब कुछ देखना।

फ़ायदा संख्या 4 – आप स्वतः स्वच्छ हो जायेंगे। नहीं, नहीं। ये स्वच्छ भारत अभियान वाला स्वच्छ नहीं है। वो तो विफल हो गया है। इस प्रमाणपत्र से आपके पुराने सारें कुकर्म छुप जायेंगे। नहीं, नहीं, आपको देशभक्ति करने के लिये फिर स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने की भी ज़रूरत नहीं।

फ़ायदा संख्या 5 – दूसरों पर कीचड़ उछालने पर भी आपके हाथ गंदे नहीं होंगे। जी हाँ, ये हमारा ऐसा प्रमाणपत्र हो जो आपको भले मडप्रूफ न बनाए पर आपके द्वारा किसी दूसरे पर उछाले कीचड़ से आपकी रक्षा ज़रूर करेगा।

तो ये रहे देशभक्ति के प्रमाणपत्र के चंद पर महत्वपूर्ण फ़ायदे। काश, चंद्रशेखर आजाद और भगतसिंह ने देशभक्ति के प्रमाणपत्र की खोज की होती तो उन्हें अपनी जान न देने पड़ती। उप्स, माफ़ कीजियेगा। अगर उन्होंने देशभक्ति के प्रमाणपत्र की खोज की होती तो उन्होंने “Long Live the Queen/King” कहा होता।

Note:- ये लेख तत्काल में चल रही गतिविधियों पर एक व्यंग्य है। कृपया इसे गंभीरता से लें और सोचें कि कौन वो लोग हैं जो देश की समस्याओं पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे कज़िन लव और शादी वर्जित बन गई?

क्यों कज़िन मैरिज विवादित है?

कज़िन मैरिज न तो अप्राकृतिक हैं न ही असामाजिक। अगर कज़िन मैरिज के विवादित होने का कुछ कारण है तो वो है माता-पिता की युवा पर अंकुश लगाने की ज़िद। दुनिया के चार प्रमुख धर्मों: ईसाई, इस्लाम, हिंदू और बौद्ध में केवल भारतीय हिंदुओं को ही कज़िन मैरिज के समस्या है। इस पर भी केवल उत्तर भारतीय हिंदुओं की ही ये अवधारण है कि कज़िन भाई-बहिन होते हैं। इन में से ज्यादातर इस मामले में बात नहीं करना चाहते, पर सिर्फ़ आपके बात न करने से किसी समस्या का निवारण संभव नहीं। स्वैच्छिक कज़िन मैरिज पर उत्तर भारतीयों का विरोध और विरोध के लिये ऊलजलूल तर्क हास्यप्रद हैं। इस पर युवा भी अब कज़िन मैरिज पर होने वाले विरोध पर सवाल करने लगा है। कज़िन मैरिज पर होते विरोध के समर्थन में भारतीय हिंदुओं के पास केवल एक ही तर्क है – “Prohibited Degree of Relationship”।

क्या है “Prohibited Degree of Relation”?

भारत देश की विधानसभा का एक बहुत घृणित सत्य है, वो युवा को लेकर उदासीन है और दक़ियानूसी भी। बात 1955 में भी देश की विधान रचनाकार दक़ियानूसी थे। भले ही उन में से कुछ ने देश के लिये जान दी हो, पर वो लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन और पहचान की थी। कहना ग़लत न होगा कि उन्होंने हमें एक गड्ढे से निकाला और गड्ढे पर लगी पट्टी बदल कर वापस उसी गड्ढे में डाल दिया। हमें ग़लत न समझे, हम उन तमाम शहीदों को भी नमन करते हैं जिन्होंने हमें अशिक्षा के अंधकार से निकालने की कोशिश तक नहीं की, पर फ़िर भी हमें उन लोगों से रोष है जिन्होंने उन चीज़ों की सही करने की कभी कोशिश नहीं की जिसे सही करने की सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।

कुछ भी हो, जब हिन्दू विवाह अधिनियम बन रहा था तब हमारे देश के कर्णधार विवाह की परिभाषा तय कर देना चाहते थे। ताकि हिन्दू विवाह, मुस्लिम विवाह से, बिल्कुल अलग रहे इसलिये उन्होंने “prohibited degree of relationship” बनाया। इस तरह हमारे आज़ाद देश के कर्ता-धर्ताओं ने देश के सबसे बड़े तबक़े को शादी जैसे संवेदनशील मुद्दे के लिये युवा को समाज और परिजनों का ग़ुलाम बना दिया। उन्होंने हमें तैंतीस प्रकार के रिश्तों में बाँध दिया। बाप बेटी और माँ बेटे से लेकर दूर-दराज़ के संबंधी तक को विवाह करने से मनाही कर दी गई।

Full list of Degrees of Prohibited Degree of Relationship

पर उन्होंने ऐसा क्यों किया?

उन्होंने ऐसा क्यों किया इसका जवाब उन लोगों के साथ उनकी कब्र में जा चुका है। फ़िर भी हम इतिहास से सत्य की खोज कर सकते हैं।

चलिये, कुछ साल पीछे जाइये और भारतीय परिवारों की संरचना देखिये। आपका क्या दिखता है? सिर्फ़ संयुक्त परिवार। जिन्हें संयुक्त परिवार के बारें में नहीं पता वो जान लें कि संयुक्त परिवार में एक ही व्यक्ति की कई पीढ़ियाँ एक-साथ निवास करती हैं। ऐसे परिवार में सबसे अमीर सबसे ताकतवर होता है और सबसे बूढ़ा सबसे सम्मानित। जब संयुक्त परिवार होते थे तो एक व्यक्ति के सारें बेटे एक ही घर में रहते थे, साथ में रहते थे उनके बच्चे।

भारतीय संस्कृति में हम नियोजित प्रजनन में विश्वास रखते हैं… जरा एक मिनट रुकिये, नहीं ऐसा नहीं है, हम नियंत्रित प्रजनन में विश्वास रखते हैं। नियंत्रित प्रजनन उसी तरह है जैसे बेचने के लिये घोड़ों की होती है। अगर विश्वास न हो तो अखबार का ‘परिणय’ पृष्ठ (Matrimonial Page) निकालिये। जी हाँ, इसी को कहते हैं नियंत्रित प्रजनन। यही वो तरीक़ा जिससे लोग अपने घोड़ों… मेरा मतलब है अपने बच्चों के लिये रात-का-साथी ढूँढ़ते हैं। अगर ये नियोजित प्रजनन होता तो हम 120 करोड़ न हुए होते। हालाँकि, हम 120 करोड़ हैं पर हमारी दशा क्या है? शायद ये सोचने की ज़रूरत है कि आपके पूर्वज अगर मध्यमवर्गी थे तो आप भी मध्यमवर्गी क्यों रह गए?

आज ही की तरह, संयुक्त परिवार में भी बच्चे संख्या में अपने माता-पिता को पछाड़ देते थे। एक जोड़ा रातों-रात सात-सात बच्चों की पूरी टोली बना लेता था।

किसी तरह, ज्यादातर परिजन एक अवधारणा को हर बच्चे के हलक के नीचे उतार देते थे कि जिससे भी वो मिलते हैं वो उनके भाई-बहिन हैं। उन्होंने एक दूसरे को भाई-बहिन कहा, इसमें कोई बुराई नहीं। अच्छा होता अगर बच्चे उसे दिल से मानते (इस तरह देश की जनसंख्या इतनी भयानक न हुई होती, सब भाई-बहिन हुए तो कोई प्रजनन नहीं)। हक़ीक़त में ये बच्चों के माता-पिता के साथ भी हुआ था और दादा-दादी के साथ भी। सबको एक दूसरे का भाई-बहिन बताने की काम किया जाता था। वो एक दूसरे को भाई-बहिन मानते थे भले उनके बीच रक्त संबंध रहा हो या नहीं। यहाँ तक कोई समस्या नहीं थी। समस्या तब शुरु हुई जब माता-पिता ने ये सोचना शुरु कर दिया कि अगर हम किसी रिश्तेदार को भाई-बहिन बोलते हैं तो उसके और हमारे बच्चे भी आपस में भाई-बहिन होंगे।

कालांतर में, जब कज़िन्स (रिश्तेदार) साथ रहते थे तो वो भी यही समझते थे कि वो भाई-बहिन हैं। आज, जब परिवार बिखर चुके हैं और सब दूर-दूर रहने लगे है तो एक सत्य उस अवधारणा पर भारी पड़ गया हैः – “रिश्तेदार भाई बहिन नहीं होते।”

पर यहाँ कहानी ख़त्म नहीं होती। अब सत्य और अवधारणा के बीच में घर्षण होने लगा है। इसी लिये प्रेमी हत्या (जिसे लोग कुटिलतापूर्वक Honor Killing का नाम देते हैं) अस्तित्व में है। लेकिन सिर्फ़ कुछ बताने से समस्या का निवारण नहीं होता। हमें ये सत्य समझना होगा कि चाचा के बच्चे, मामा के बच्चे, फूफा के बच्चे आपस में भाई-बहिन नहीं, वो सिर्फ़ रिश्तेदार हैं।

इसी श्रृंखला का हमारा अगला लेख पढ़ियेः-

Legality of Cousin Marriages and the big friction-Part-3